कोरबा 12 अप्रैल। अगर आप कोरबा की जहरीली आबोहवा से बचने के लिए ‘अशोक वाटिका’ की शुद्ध ऑक्सीजन के भरोसे हैं, तो फिलहाल अपनी सांसें रोक लीजिए! क्योंकि प्रशासन ने फैसला किया है कि शहरवासियों को सेहतमंद रहने की कुछ ज्यादा ही बुरी आदत लग गई है। इसीलिए, बिना किसी ठोस कारण और बिना किसी ‘माई-बाप’ के आदेश के, 10 से 14 अप्रैल तक इस ‘ऑक्सीजोन’ पर ताला जड़ दिया गया है। हुक्मरानों ने बिना बताए, बिना जताए ‘ऑक्सीजोन’ के गेट पर ऐसा ताला जड़ा है कि योग साधकों के ‘प्राणायाम’ आधे रास्ते में ही अटक गए हैं।
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फरमान ऐसा कि मुग़ल भी शरमा जाएं!
कहते हैं लोकतंत्र में जनता मालिक होती है, लेकिन कोरबा नगर निगम ने साबित कर दिया कि असली मालिक तो ‘ताला और चाबी’ वाले साहब हैं। 10 से 14 अप्रैल तक अशोक वाटिका को क्यों बंद किया गया? क्या पेड़ छुट्टी पर गए हैं या घास को आराम की जरूरत है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। गेट पर एक कागज़ चिपका दिया गया है, जैसे कोई गुप्त सरकारी फाइल हो।
साहब का आदेश है, पर साहब कौन है?
मजे की बात देखिए, सूचना तो है कि वाटिका बंद रहेगी, लेकिन यह ‘फरमान’ किसका है? क्यों है? और जनता को पहले से क्यों नहीं बताया गया? इन सवालों का जवाब शायद उसी ताले के अंदर बंद है।
योगियों का ‘आसन’ डोल गया, वॉकर्स की ‘चाल’ बिगड़ गई
सुबह-सुबह जब शहर के स्वास्थ्य प्रेमी अपनी तोंद कम करने और फेफड़ों को साफ़ करने वाटिका पहुंचे, तो वहां का नज़ारा देखकर उनका ब्लड प्रेशर बिना चले ही बढ़ गया। बेचारे बुजुर्ग और योग साधक गेट के बाहर खड़े होकर एक-दूसरे का मुंह ताकते रहे। उन्हें ताजी हवा की जगह ‘लोहे का ठंडा ताला’ नसीब हुआ। कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद दिनेश सोनी ने भी इस ‘अघोषित इमरजेंसी’ पर सवाल उठाए और चुटकी लेते हुए पूछा है कि आखिर यह रहस्यमयी आदेश आया कहां से? लाखों की लागत से बनी इस वाटिका को अचानक ‘अघोषित जेल’ में तब्दील करने के पीछे क्या कोई गुप्त मिशन चल रहा है? या फिर प्रशासन चाहता है कि लोग गार्डन के बजाय धूल-धुएं में ही प्राणायाम करने की प्रैक्टिस करें?
‘मौन साधना’
आमतौर पर छोटी-छोटी उपलब्धियों का ढिंढोरा पीटने वाला नगर निगम इस मामले में ‘मौन व्रत’ पर है। न कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज, न कोई सोशल मीडिया अपडेट। बस गेट पर एक पर्चा चिपका दिया, जैसे कोई गुप्त खजाना छुपाया जा रहा हो। जनता परेशान है, लोग गेट से लौट रहे हैं।
व्यंग्य का तड़का: “लगता है वाटिका के पेड़ों को भी 14 तारीख तक वीआईपी ट्रीटमेंट की जरूरत है, या शायद नगर निगम ने तय कर लिया है कि सेहत सुधारना ‘गैर-कानूनी’ गतिविधि की श्रेणी में आता है!”








