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‘दबदबा’ और ‘दहला’: मनेंद्रगढ़ के ‘खिलाड़ी’ नेताजी ने सिस्टम को दिखाया ठेंगा!

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The Khatiya Khadi News मनेंद्रगढ़: लगता है छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में कानून की किताब अब ‘ताश के पत्तों’ से लिखी जा रही है। सोशल मीडिया पर एक ऐसी रील वायरल हुई है, जिसे देखकर बड़े-बड़े फिल्ममेकर भी शर्मा जाएं। सत्ता की हनक और जुए की फड़कती चालों के बीच हमारे एक माननीय बीजेपी नेताजी कैमरे के सामने अपनी ‘किस्मत’ और ‘दबदबा’ दोनों आजमाते नजर आ रहे हैं।

रील भी ऐसी कि ऑस्कर मिल जाए!

नेताजी ने इस वीडियो को किसी जासूसी कैमरे के डर से नहीं, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ ‘रील’ बनाकर पोस्ट किया है। वीडियो में ताश के पत्ते फिंक रहे हैं और बैकग्राउंड में रसूख का शोर है। लेकिन असली ‘तड़का’ तो उस कैप्शन ने लगाया है जिसे पढ़कर पुलिस ने शायद अपनी आंखों पर पट्टी और कानों में रुई डाल ली होगी।

कैप्शन कहता है: “हमारा दबदबा है, कोई हाथ नहीं लगा सकता।”

वाह! इसे कहते हैं ईमानदारी। नेताजी ने खुलेआम कबूल कर लिया है कि कानून उनके घर की खेती है और पुलिस महज एक दर्शक। जुआ घर में नहीं, बल्कि ‘सिस्टम के सीने’ पर खेला जा रहा है।

पुलिस की ‘चुप्पी’ या ‘मजबूरी’?

शहर के चौक-चौराहों पर जनता पूछ रही है कि क्या पुलिस को इस रील का नोटिफिकेशन नहीं मिला? या फिर ‘दबदबा’ शब्द का वजन इतना ज्यादा है कि खाकी वर्दी उसके नीचे दब गई है? जब सत्ता के रसूखदार खुद ही रील बनाकर अपनी ‘अवैध’ कलाकारी का प्रदर्शन करें, तो आम आदमी तो यही सोचेगा कि— “भैया, हम ही पागल हैं जो हेलमेट न पहनने पर चालान भरते हैं!”

 ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली अग्निपरीक्षा

बीजेपी के जिला आलाकमान के लिए यह किसी ‘धर्मसंकट’ से कम नहीं है। एक तरफ पार्टी की साख है, तो दूसरी तरफ अपने ही नेता का ‘जुआरिया’ स्वैग। अब देखना यह है कि पार्टी अपने इस ‘खिलाड़ी’ को टीम से बाहर (सस्पेंड) करती है या फिर यह मान लिया जाए कि ‘दबदबा’ वाकई में कानून से चार कदम आगे है।

निष्कर्ष: फिलहाल तो मनेंद्रगढ़ में रील सुपरहिट है, नेताजी फिट हैं और कानून थोड़ा सा ‘अनफिट’ नजर आ रहा है।

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