कोरबा। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के पोड़ी स्थित 100 सीटर कन्या छात्रावास में पिछले कुछ दिनों से मचा हड़कंप अब शांत हो गया है। छात्राओं के असामान्य व्यवहार और अचानक झूमने की घटनाओं के बाद फैली ‘भूत-प्रेत’ की अफवाहों पर शिक्षा विभाग ने विराम लगा दिया है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह मामला किसी अंधविश्वास से नहीं, बल्कि परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव से जुड़ा है।
क्या था मामला?
बीते दिनों छात्रावास की लगभग एक दर्जन छात्राओं के व्यवहार में अचानक बदलाव देखा गया। छात्राएं एकाएक झूमने और अजीब हरकतें करने लगी थीं। डर के मारे ग्रामीण और अभिभावक इसे ऊपरी साया मानने लगे और आनन-फानन में पांच छात्राएं हॉस्टल छोड़कर घर लौट गईं।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) टीपी उपाध्याय और बीईओ एचआर दयाल ने छात्रावास का निरीक्षण किया। छात्राओं से विस्तृत चर्चा और काउंसलिंग के बाद विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि:
-
मास साइकोजेनिक इलनेस: वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रभाव’ कहा जाता है, जहाँ डर या तनाव के कारण एक साथ कई लोग एक जैसा असामान्य व्यवहार करने लगते हैं।
-
परीक्षा का डर: आगामी परीक्षाओं को लेकर छात्राओं में काफी तनाव था।
-
शारीरिक कारण: नींद की कमी, घर से दूर रहने की भावनात्मक व्याकुलता और पढ़ाई के बोझ ने स्थिति को गंभीर बना दिया।
प्रशासन की पहल
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने छात्राओं और उनके परिजनों को समझाया कि भूत-प्रेत जैसी बातें पूरी तरह निराधार हैं। छात्राओं की काउंसलिंग की गई और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने के तरीके बताए गए। प्रशासन ने अब छात्रावास में नियमित स्वास्थ्य जांच और मनोवैज्ञानिक सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
विशेषज्ञों की राय: परीक्षा के समय बच्चों को डराने के बजाय उनके साथ संवाद करना जरूरी है। मानसिक तनाव शारीरिक लक्षणों के रूप में प्रकट हो सकता है, जिसे प्यार और सही मार्गदर्शन से ठीक किया जा सकता है।








