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गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर पहली बार दिखेगा सेना का ‘साइलेंट वॉरियर्स’ दस्ता, बैक्ट्रियन ऊंट और शिकारी पक्षी बढ़ाएंगे परेड की शान

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Republic Day 2026: ‘Silent Warriors’ to Debut on Kartavya Path; Bactrian Camels and Birds of Prey to Grace the Parade

नई दिल्ली। 26 जनवरी 2026 को होने वाला गणतंत्र दिवस समारोह न केवल गौरवशाली होगा, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा। इस बार परेड में पहली बार भारतीय सेना का एक विशाल और संगठित ‘पशु दस्ता’ शामिल होने जा रहा है। ‘साइलेंट वॉरियर्स’ के नाम से जाना जाने वाला यह दस्ता दुर्गम सीमाओं पर सेना की ताकत बनने वाले उन जांबाज पशुओं को समर्पित है, जो खामोशी से देश की रक्षा में जुटे रहते हैं। ” आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”

दो कूबड़ वाले ऊंट और ज़ांस्कर पोनी होंगे आकर्षण का केंद्र

 

इस खास दस्ते में लद्दाख की बर्फीली वादियों और ऊंचे पहाड़ों पर सेना का सामान ढोने वाले बैक्ट्रियन ऊंट (दो कूबड़ वाले ऊंट) मुख्य आकर्षण होंगे। इनके साथ ही पहाड़ों की ढलानों पर बिजली की रफ्तार से चलने वाले ज़ांस्कर पोनी (छोटे घोड़े) भी अपनी अनुशासित चाल से दर्शकों का मन मोह लेंगे। ये वो पशु हैं जो शून्य से नीचे के तापमान में भी सेना की रसद और हथियार पहुंचाने का काम करते हैं।” आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज”

आसमान से नजर रखेंगे ‘शिकारी पक्षी’

परेड में पहली बार सेना के रैप्टर्स (शिकारी पक्षी) भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। ये पक्षी दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही नाकाम करने और निगरानी रखने के लिए प्रशिक्षित किए गए हैं। यह आधुनिक युद्ध कौशल और प्रकृति के तालमेल का एक अद्भुत उदाहरण होगा।

सेना के वफादार कुत्तों का शौर्य

परेड की कतार में भारतीय सेना के सबसे वफादार साथी ‘आर्मी डॉग्स’ भी शामिल होंगे। इस दस्ते में:

  • 10 भारतीय नस्ल के कुत्ते: जो ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी ताकत का प्रतीक हैं।

  • 6 अनुभवी सैन्य कुत्ते: जिन्होंने कई ऑपरेशन्स में विस्फोटक खोजने और आतंकियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्यों खास है यह पहल?

अब तक गणतंत्र दिवस की परेड में हम ऊंटों की टुकड़ी और घोड़ों को देखते आए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब इतनी विविधता के साथ पशुओं का एक ‘संगठित दस्ता’ शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन बेजुबान योद्धाओं को सम्मान देना है जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों के कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

प्रमुख विशेषताएं

  • नाम: ‘साइलेंट वॉरियर्स’ (Silent Warriors) दस्ता।

  • पहली बार: बैक्ट्रियन ऊंट और शिकारी पक्षियों का परेड में पदार्पण।

  • स्वदेशी गौरव: भारतीय नस्ल के सेना कुत्तों को विशेष स्थान।

  • संदेश: सीमाओं की सुरक्षा में पशुओं के योगदान का वैश्विक प्रदर्शन।

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