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कांकेर में शव दफ़नाने को लेकर तनाव, मसीही समाज और ग्रामीणों के बीच टकराव

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Tension over burial in Kanker, clash between Christian community and villagers

कांकेर छत्तीसगढ़: कांकेर जिले के कोडेकुर्से गांव में 50‑वर्षीय मनीष निषाद की मौत के बाद उनका शव दफ़नाने को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया। मनीष ने कुछ साल पहले हिंदू धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म अपनाया था। 4 नवंबर को रायपुर में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया और परिजन शव लेकर अपने निजी ज़मीन पर दफ़नाने की तैयारी कर रहे थे।

ग्रामीणों ने गांव की ज़मीन में दफ़नाने का कड़ा विरोध किया, क्योंकि स्थानीय रीति‑रिवाज़ के अनुसार बिना बैगा और समाज प्रमुख की अनुमति के शव को गांव की सीमा में दफ़नाया नहीं जाता। इस पर मसीही समाज ने थाने का घेराव कर अनुमति की मांग की। पुलिस ने शव को कोडेकुर्से अस्पताल के मोर्च्युरी में रखवा दिया।

परिवार और मसीही समाज के लोग शुक्रवार को शव लेकर चारामा पहुंचे, लेकिन हिंदू संगठनों ने गाड़ी रोक कर शव को दफ़नाने से इनकार कर दिया। हंगामे के बाद पुलिस ने शव को रायपुर ले जाकर सुरक्षित रखा। अब तक तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अंतिम संस्कार अभी नहीं हो पाया।

मुख्य बिंदु
_मृतक_: मनीष निषाद (50), कोडेकुर्से निवासी, ईसाई धर्म में परिवर्तित।
_विरोध का कारण_: ग्रामीणों का कहना है कि गांव की ज़मीन में दफ़नाने की परम्परा नहीं है; बैगा‑समाज प्रमुख की अनुमति ज़रूरी है।
_पिछला मामला_: 24 जुलाई 2025 को जामगांव में भी ईसाई शव को दफ़नाने पर 500‑1000 लोगों ने बवाल किया था।
_पुलिस की कार्रवाई_: शव को मोर्च्युरी में रखवाया, फिर रायपुर ले जाया गया; अतिरिक्त एसपी आकाश श्रीमाल ने कहा कि निर्णय बाद में बताया जाएगा।

स्थानीय जिला पंचायत सदस्य देवेन्द्र टेकाम ने कहा कि गांव की रुढ़ी‑परम्परा के अनुसार ही दफ़नाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। वहीं, पास्टर मोहन ग्वाल ने प्रशासन से वैकल्पिक समाधान की गुहार लगाई है।

 

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