बागपत उत्तर प्रदेश 29 सितंबर 2026 Baraut Kavi Sammelan : उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत स्थित एक कॉलेज में रविवार रात को भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास समेत कई प्रतिष्ठित कवियों ने शिरकत की। मंच से अपनी कविताओं और व्यंग्य बाणों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने के साथ-साथ कुमार विश्वास ने वैश्विक राजनीति, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर जमकर अपनी बात रखी।

ट्रंप के 100% टैरिफ पर अमेरिका को दिया जवाब
कवि सम्मेलन के दौरान कुमार विश्वास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ (शुल्क) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जैसी मजबूत अर्थव्यवस्था और उसकी जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “इस देश में दो ही लोग हैं, जिनका मैं फैन हूं—एक प्रधानमंत्री जी और दूसरे रामदेव जी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 100 प्रतिशत टैरिफ बढ़ा दिया। बताओ हम पर क्या असर पड़ा? जिसे बीड़ी पीनी है, वह पी रहा है या नहीं? जिसे रात में जो पीना था, वह पी रहा है या नहीं? आप दूसरे देशों को आंख दिखाओ, 100 फीसदी या 1000 फीसदी टैरिफ बढ़ा दो, भारत पर कोई असर नहीं पड़ता।”
‘पीएम मोदी अलग तरह के नेता हैं’
डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी भरे अंदाज में कुमार विश्वास ने कहा कि अमेरिका को यह नहीं पता कि वह किससे डील कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा, “उसे (ट्रंप को) नहीं पता कि वह किससे डील कर रहा है और भारत का प्रधानमंत्री कौन है। यह आदमी अलग तरीके का है, जिससे ये डील कर रहा है—नरेंद्र मोदी नाम है उनका। यह वो चिंगम हैं, जो अगर एक बार बालों में फंस जाए, तो फिर मुंडन कराकर ही मानती है। और बहुत सारे लोगों का हुआ भी है।”
2002 से पीएम मोदी पर भरोसा और ‘जापान वाली डील’
कुमार विश्वास ने कहा कि वह साल 2002 से ही नरेंद्र मोदी पर भरोसा करते आए हैं। उन्होंने पीएम मोदी की कूटनीति और व्यापारिक समझ की तारीफ करते हुए शिंजो आबे के साथ हुई बुलेट ट्रेन डील का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने एक बार कहा था कि ‘मैं गुजराती हूं, मेरे खून में व्यापार है।’ तब भाजपा वाले भी सोचने लगे थे कि पीएम क्या बोल रहे हैं, लेकिन मैंने कहा था कि उन्होंने कहा है तो कुछ न कुछ जरूर होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री जापान गए और वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे से बुलेट ट्रेन चलाने के लिए 50 साल के लिए उधार ले आए। व्यापार इसे कहते हैं। जिसका हमने एक बार ले लिया… हमको उधार तो वही दे, जिसका पुनर्जन्म में भरोसा हो!”
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान बड़ौत का पांडाल तालियों और ठहाकों से गूंजता रहा।




