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अस्पतालों की चमक बढ़ी, पर गायब हैं डॉक्टर! जानिए दुनिया में क्यों गहराया मेडिकल संकट

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वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने दोहरी चुनौती: असमानता और डॉक्टरों की उम्र पर बड़ी चिंता

नई दिल्ली 20 सितंबर 2026 Healthcare Crisis : पिछले दो दशकों में दुनिया भर में डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद, हर नागरिक तक समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आज भी एक अधूरी चुनौती बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नवीनतम रिपोर्ट ‘नेशनल हेल्थ वर्कफोर्स एकाउंट्स: हेल्थ वर्कफोर्स लेवल्स एंड ट्रेंड्स 2026’ के अनुसार, वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन की भारी वृद्धि के बावजूद भौगोलिक असमानता और डॉक्टरों की बढ़ती उम्र ने स्वास्थ्य प्रणालियों के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है।

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20 वर्षों में 52% बढ़ा स्वास्थ्यकर्मियों का घनत्व

डब्ल्यूएचओ के विस्तृत आकलन के मुताबिक, वर्तमान में दुनिया भर में स्वास्थ्य और देखभाल (केयर) क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की कुल संख्या 7 करोड़ से अधिक हो गई है।

  • 2006 का आंकड़ा: प्रति 10,000 आबादी पर औसतन 44.8 स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध थे।

  • 2025 का आंकड़ा: यह संख्या बढ़कर प्रति 10,000 आबादी पर 67.9 हो गई है।

  • उपलब्धता में वृद्धि: पिछले 20 वर्षों में प्रति आबादी स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता में 52% की बढ़ोतरी हुई है।

इस गणना में डॉक्टर, नर्स, दाई (मिडवाइफ), दंत चिकित्सक और फार्मासिस्ट जैसे पेशेवर शामिल हैं। हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केवल आंकड़े बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है; स्वास्थ्यकर्मियों की विशेषज्ञता, उनकी स्थिति और जरूरतमंदों तक उनकी पहुंच असली मुद्दा है।

महाद्वीपों के बीच भारी असमानता: यूरोप बनाम अफ्रीका

रिपोर्ट में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के असमान वितरण को उजागर किया गया है। आर्थिक विषमता का सीधा प्रभाव स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता पर पड़ रहा है:

  1. डॉक्टरों का घनत्व: यूरोपीय क्षेत्र में डॉक्टरों की उपलब्धता अफ्रीकी क्षेत्र की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक है।

  2. नर्स और दाईयां: यूरोप में नर्सों और दाइयों का घनत्व अफ्रीका की तुलना में 6 गुना अधिक है।

जिन देशों के पास प्रशिक्षण, शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, वहां डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी है। इसके कारण ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है और अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव बढ़ रहा है।

संकट बढ़ाती बुजुर्ग आबादी और डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति

रिपोर्ट की सबसे गंभीर चिंताओं में से एक है स्वास्थ्य कार्यबल का तेजी से बुजुर्ग होना।

  • वैश्विक स्थिति: दुनिया भर में हर चार में से एक डॉक्टर (25%) की उम्र 55 वर्ष से अधिक है।

  • उच्च आय वाले देश: समृद्ध देशों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां हर तीन में से एक डॉक्टर (33%) 55 वर्ष या उससे अधिक आयु का है।

यह जनसांख्यिकी बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इससे हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और पुरानी (क्रॉनिक) बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर अनुभवी डॉक्टरों के सेवानिवृत्त होने और उनकी जगह नए कर्मियों के तैयार न हो पाने से वैश्विक स्वास्थ्य ढांचा चरमरा सकता है।

डेटा संग्रह और पारदर्शिता में 20 गुना सुधार

डब्ल्यूएचओ ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

  • वर्ष 2025 में 90% से अधिक सदस्य देशों ने अपने स्वास्थ्यकर्मियों का आधिकारिक डेटा साझा किया।

  • पिछले वर्षों की तुलना में आंकड़े जुटाने और उनकी पारदर्शिता में 20 गुना सुधार दर्ज किया गया है।

इससे भविष्य की जरूरतों का सटीक अनुमान लगाने और देशों के बीच तुलनात्मक योजना बनाने में मदद मिलेगी।

केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, इंसानों में निवेश जरूरी

डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण केवल नई इमारतें, अस्पताल या अत्याधुनिक मशीनें लगाने से नहीं होगा। डॉक्टर, नर्स, तकनीकी कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी किसी भी देश की रीढ़ होते हैं। इसलिए, वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की शिक्षा, प्रशिक्षण, सुरक्षा, भर्ती और बेहतर कामकाजी माहौल में तत्काल निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

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