अयोध्या/लखनऊ 25 जून : राम मंदिर चढ़ावा चोरी और जमीन विवाद को लेकर उपजा जनाक्रोश अब बड़ी पुलिसिया कार्रवाई और कड़े सियासी संग्राम में बदल चुका है। विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन द्वारा आधिकारिक मुकदमा दर्ज कराते ही पुलिस ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है। इस मामले में 3 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि 5 अन्य को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
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FIR में नामजद 8 आरोपी: किसकी क्या है स्थिति?
मामले में दर्ज एफआईआर में 8 लोगों को सीधे तौर पर नामजद किया गया है, जिनकी सूची इस प्रकार है:
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रामशंकर यादव (टिन्नू) — (गिरफ्तार)
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लवकुश मिश्रा — (गिरफ्तार)
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अनुकल्प मिश्रा — (गिरफ्तार)
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अविनाश शुक्ला — (हिरासत में, पूछताछ जारी)
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मनीष यादव — (हिरासत में, पूछताछ जारी)
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रमाशंकर मिश्रा — (हिरासत में, पूछताछ जारी)
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सुभाष चंद्र श्रीवास्तव — (हिरासत में, पूछताछ जारी)
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करुनेश पांडेय — (हिरासत में, पूछताछ जारी)
7 जून से शुरू हुआ एक्शन: अब तक का घटनाक्रम
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7 जून: चढ़ावा चोरी का यह संवेदनशील मामला पहली बार उजागर हुआ।
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13 जून: चौतरफा दबाव और ट्रस्ट के अनुरोध के बाद सरकार ने SIT का गठन किया।
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23 जून: SIT ने महज 10 दिनों के भीतर अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
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25 जून: एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपियों की धरपकड़ शुरू हुई।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद चमकी किस्मत, मुख्य आरोपी के पास मिली चाबियां
जांच में सामने आया चौंकाने वाला तथ्य यह है कि दानपात्रों की चाबियां मुख्य आरोपी टिन्नू के पास से बरामद हुई हैं। SIT ने मंदिर के ऐसे करीब 150 सेवादारों और कर्मचारियों को चिन्हित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ठीक बाद अचानक रातों-रात अकल्पनीय उछाल आया।
कानूनी कार्रवाई: इन सभी संदिग्धों पर ‘सेवक द्वारा चोरी’ (भारतीय न्याय संहिता – BNS की धारा 306) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें 7 साल तक की जेल का कड़ा प्रावधान है।
सियासी घमासान: “बड़ी मछलियों को बचाने का खेल”
भले ही पुलिस ने छोटे कर्मचारियों पर शिकंजा कसा हो, लेकिन विपक्ष ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों को निशाने पर लिया है। पूर्व में आई रिपोर्टों के अनुसार, SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 बड़े चेहरों को जांच के दायरे में रखा था।
अखिलेश यादव का तंज:
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए एक्स (ट्विटर) पर लिखा:
“भाजपा राज में नाइंसाफ़ी की दिखेगी ये झांकी, फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी माफ़ी!”
अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाया कि जनता के बीच यह चर्चा है कि SIT के बहाने पहले ही सारे सबूत साफ कर दिए गए ताकि यह तय किया जा सके कि किन ‘बड़ी मछलियों’ को बचाना है।
संजय सिंह ने सौंपे 11 पुख्ता सबूत:
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह भी इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। वे लखनऊ में SIT अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के दफ्तर पहुंचे और करीब 12 मिनट की मुलाकात में जमीन घोटाले से जुड़े 11 पुख्ता दस्तावेज सौंपे। दफ्तर से बाहर आकर उन्होंने तीखा सवाल दागा:
“चंपत राय पर जमीनों और चढ़ावे से जुड़े गंभीर आरोप हैं। क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे बड़े चेहरों के नाम मुख्य एफआईआर में दर्ज हैं? सरकार को यह तुरंत स्पष्ट करना चाहिए।”
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