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AI की महाक्रांति: अब जानवर बोलेंगे इंसानों की भाषा, लेकिन क्या धरती का सारा पानी पी जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस?

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नई दिल्ली / टेक डेस्क 20 जून : यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म या किसी एनिमेटेड मूवी का दृश्य नहीं है, बल्कि हमारी आंखों के सामने हकीकत बनने जा रहा है। अब कुत्ता किस बात पर भौंक रहा है या बिल्ली क्यों रो रही है, इसका एक-एक सटीक मतलब आपको पता चल सकेगा। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) हेल्थ, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी और स्पेस मिशन से लेकर आपके घर के किचन तक कब्जा जमाने के बाद अब AI (Artificial Intelligence) एक ऐसा कारनामा करने जा रहा है, जिसे सुनकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।

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लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू बेहद डरावना है। जहां एक तरफ AI से दुनिया हैरान है, वहीं दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क से लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) तक इसके विनाशकारी खतरों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। दावा यहाँ तक है कि यह तकनीक दुनिया का सारा पानी पी जाएगी और जेब में रखे नोटों की वैल्यू हमेशा के लिए खत्म कर देगी।

1. आखिर कैसे बोलेंगे जानवर? चीन का ‘स्मार्ट एआई कॉलर’

चीन इस वक्त AI की फील्ड में नेक्स्ट लेवल का काम कर रहा है। चीन के एक कमाल के टेक स्टार्टअप, जिसका नाम Meng Xiaoyi है, उसने जानवरों की भाषा समझने और उसे इंसानी भाषा में ट्रांसलेट करने वाली एक गजब की डिवाइस बना ली है।

इस डिवाइस की खासियतें:

  • स्मार्ट एआई कॉलर: यह डिवाइस एक पट्टे की तरह है, जिसे जानवरों के गले में पहना दिया जाएगा।

  • बॉडी लैंग्वेज ट्रैकिंग: यह कॉलर जानवर के भौंकने या म्याऊं करने की आवाज को रिकॉर्ड करने के साथ-साथ उसकी पूंछ की हरकत, उसके चलने का तरीका, उसके बैठने और लेटने की मुद्रा यानी हर एक शारीरिक एक्टिविटी को बारीकी से ट्रैक करता है।

  • अलीबाबा क्लाउड का दिमाग: यह पूरी डिवाइस अलीबाबा क्लाउड के Qwen AI मॉडल पर आधारित है। यह एआई मॉडल जानवर के सारे डेटा और उसकी भावनाओं को प्रोसेस करता है और फिर उसका मतलब इंसान को समझाता है।

  • 95% सटीकता का दावा: चीनी कंपनी का दावा है कि उनका यह डिवाइस 95% बिल्कुल सही जवाब देता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसका कोई वैज्ञानिक डेटा या रिसर्च पब्लिश नहीं की है, लेकिन लोगों में इसका क्रेज इस कदर है कि 1 मई से शुरू हुई प्री-ऑर्डर बुकिंग में अब तक 10 हजार से ज्यादा ऑर्डर मिल चुके हैं।

2. सब्जीवाला और मैकेनिक सिखा रहे हैं रोबोट्स को काम (फिजिकल एआई)

AI सिर्फ जानवरों को बुलवाने तक ही सीमित नहीं है। आने वाले समय में ह्यूमनॉइड रोबोट्स (इंसान जैसे दिखने वाले रोबोट) आपके घर और फैक्ट्रियों के सारे काम करने वाले हैं।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन्हें यह काम कोई बड़ा साइंटिस्ट नहीं, बल्कि हमारे और आपके बीच के आम लोग जैसे सब्जीवाला, मैकेनिक, पेंटर और मजदूर सिखा रहे हैं!

इस समय भारत समेत पूरी दुनिया में डेटा कलेक्ट करने का एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है। रोबोट्स बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां आम इंसानों के काम करने के तरीकों का डेटा इकट्ठा कर रही हैं। इसके लिए लोग खुद अपने काम की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं और बदले में कंपनियों से हर घंटे के हजारों रुपये कमा रहे हैं।

कंस्ट्रक्शन साइट्स और मंडियों का बदला नजारा: आजकल मजदूर, सब्जीवाले और पेंटर अपने सिर पर एक ‘हेड-माउंटेड कैमरा’ लगाकर काम कर रहे हैं और अपनी पूरी दिनचर्या रिकॉर्ड कर रहे हैं। इस रिकॉर्डिंग में कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाता है:

  • आंखों के सामने इस वक्त क्या चीज रखी है?

  • किसी सामान को उठाते वक्त इंसान के हाथ कैसे चलते हैं?

  • सब्जी को किस एंगल से काटा जाता है या दीवार पर पेंट कैसे किया जाता है?

  • काम करते वक्त अगर इंसान से कोई गलती हो जाए, तो वह उसे कैसे सुधारता है?

  • भीड़भाड़ वाले इलाके में कैसे चला जाता है और ग्राहक से किस लहजे में बात की जाती है?

इस डेटा के जरिए एआई को दुनिया बिल्कुल एक इंसान के नजरिए से दिखाई जा रही है। इसे ‘फिजिकल एआई’ की ट्रेनिंग कहते हैं। इस काम के लिए लोगों को 250 से 350 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से पैसे मिल रहे हैं। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) कई भारतीय कंपनियां यह डेटा इकट्ठा करके टेस्ला के ओप्टिमस और गूगल के डीपमाइंड रोबोटिक्स जैसी बड़ी कंपनियों को बेच रही हैं। लेकिन कड़वा सच यही है कि चंद रुपयों के लालच में इंसान आज अपने ही हाथों अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है, क्योंकि यही AI सब कुछ सीखने के बाद सबसे पहले इन्हीं मजदूरों, सब्जीवालों और मैकेनिकों की नौकरियां हमेशा के लिए खा जाएगा।

3. मेडिकल फील्ड में महाक्रांति: बिना रेडिएशन के 60 सेकंड में फुल बॉडी स्कैन

AI के मुख्य रूप से तीन मॉडल काम करते हैं: नैरो एआई (मौसम बताना या चेस खेलना), जनरेटिव एआई (चैटजीपीटी या मिडजर्नी की तरह टेक्स्ट/फोटो बनाना), और एजीआई (AGI) जो इंसानी दिमाग की तरह हर काम खुद सीख सकता है।

इन खतरों के बीच, मेडिकल के क्षेत्र में AI एक वरदान साबित होने जा रहा है। ‘मिडजर्नी’ (वही कंपनी जिसने सबसे पहले एआई-जेनरेटित तस्वीरों से तहलका मचाया था) अब इंसानी शरीर का स्कैन करने वाली एक ऐसी चमत्कारी मशीन बना रही है जो चिकित्सा विज्ञान को पूरी तरह बदल देगी।

  • बिना रेडिएशन के फुल बॉडी स्कैन: यह मशीन बिना किसी खतरनाक MRI और बिना किसी हानिकारक रेडिएशन के, सिर्फ अल्ट्रासाउंड तरंगों की मदद से मात्र 60 सेकंड के भीतर पूरे शरीर का स्कैन कर देगी।

  • बीमारी का एडवांस सिग्नल: यह मशीन शरीर के अंदर की हर एक छोटी विसंगति और बारीक से बारीक बदलाव को तुरंत पकड़ लेगी, जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का पता बिल्कुल शुरुआती स्टेज में ही चल जाएगा।

  • मिशन 2031: कंपनी का लक्ष्य है कि साल 2031 तक दुनिया भर में ऐसे 50,000 स्कैनर लगाए जाएं, जिससे हर महीने लगभग 1 अरब लोगों का फुल बॉडी स्कैन मुफ्त या बेहद सस्ते में हो सके।

कैसे काम करेगी ये मशीन?

यह स्कैन मशीन पानी के जरिए काम करेगी। सबसे पहले मरीज को एक प्लेटफॉर्म पर खड़ा किया जाएगा, जो धीरे-धीरे पानी के अंदर जाएगा। पानी के भीतर एक बहुत बड़ी सेंसर रिंग होगी, जो लाखों अल्ट्रासाउंड तरंगें शरीर पर भेजकर अंदर का एक परफेक्ट 3D मैप तैयार कर देगी। बार-बार MRI कराने के साइड इफेक्ट्स से तंग आ चुकी दुनिया के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।

4. दुनिया का सारा पानी पी जाएगा AI! यूएन की डरावनी चेतावनी

अब बात करते हैं उस खतरे की जिसके बारे में सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। क्या कंप्यूटर के भीतर काम करने वाला AI इस धरती से पानी का नामोनिशान मिटा सकता है? संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट तो यही कह रही है।

दरअसल, जितने भी बड़े-बड़े AI मॉडल काम करते हैं, उनके पीछे हजारों-लाखों एआई चिप्स और हैवी सर्वर चौबीसों घंटे दौड़ते रहते हैं। ये चिप्स काम करते वक्त इतनी भयंकर गर्मी पैदा करते हैं कि अगर इन्हें तुरंत ठंडा न किया जाए तो पूरा डेटा सेंटर पल भर में जलकर खाक हो सकता है। इन डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए कूलिंग टावर्स और ‘चिल्ड वाटर सिस्टम’ का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पानी पानी की तरह बहाया जाता है।

खतरा यूएन (UN) की चेतावनी
समय सीमा साल 2030 तक
पानी की खपत धरती के 1.3 अरब लोगों की बुनियादी जरूरतों के बराबर
तुलना जितना पानी आज हमारा पूरा भारत देश मिलकर इस्तेमाल करता है, उतना पानी अकेले एआई के सर्वर पी जाएंगे।

इतनी भारी खपत से दुनिया के सामने एक बहुत बड़ा जल संकट खड़ा हो जाएगा और पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। यही वजह है कि माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां अब अपने डेटा सेंटर्स को समंदर के गहरे पानी के नीचे बना रही हैं ताकि समंदर के प्राकृतिक ठंडे पानी से सर्वर को ठंडा रखा जा सके और पीने का पानी बर्बाद न हो।

5. जब AI आएगा, तो जेब में रखे पैसे की वैल्यू खत्म हो जाएगी: एलन मस्क

इस AI क्रांति के बीच, दुनिया के सबसे अमीर और बेबाक अरबपति एलन मस्क लगातार पूरी मानवता को सचेत कर रहे हैं।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) मस्क तो एआई को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक और विनाशकारी घोषित कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर दुनिया को हिलाने वाली भविष्यवाणी की है।

“भविष्य में AI और रोबोट्स इंसानों की जगह पूरी तरह ले लेंगे। जब सारे काम रोबोट्स ही करेंगे, तो इंसानों के पास करने के लिए कोई नौकरी या काम बचेगा ही नहीं। रोबोट्स बिना थके, बिना सैलरी मांगे दिन-रात काम करेंगे और इतनी भारी मात्रा में सामान और सुविधाएं पैदा करेंगे कि दुनिया में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं रहेगी। अनाज से लेकर गाड़ियों तक, सब कुछ इतनी आसानी और प्रचुरता से मिलने लगेगा कि समाज में पैसे का महत्व ही हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। जब सब कुछ मुफ्त या बेहद सस्ता होगा तो जेब में रखे नोट सिर्फ रद्दी कागज के टुकड़े बनकर रह जाएंगे।” एलन मस्क

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