लखनऊ/अयोध्या 20 जून : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का ऐलान किया है और रामभक्तों को भरोसा दिलाया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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’15 दिन का इंतजार कीजिए, सब साफ होगा’
अयोध्या में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनता और रामभक्तों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा:
“रामभक्तों से मेरी विनम्र अपील है कि अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। चिंता मत कीजिए, 15 दिन का इंतज़ार कीजिए। एसआईटी गठित हुई है, दूध का दूध, पानी का पानी होगा। सब साफ़ होगा।”
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार इस मामले की तह तक जाने के लिए पूरी तरह गंभीर है और जांच निष्पक्ष तरीके से समय सीमा के भीतर पूरी की जाएगी।
नेताओं और संबंधित लोगों को नसीहत: ‘बयानबाजी से बचें’
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीएम योगी ने राजनेताओं और ट्रस्ट से जुड़े लोगों को बेवजह की बयानबाजी न करने की सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि जब जांच चल रही हो, तो बीच में टिप्पणियां करने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
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एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार: उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे जांच पूरी होने तक धैर्य रखें।
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अपराधी बचेगा नहीं: मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा, “ये तय है कि अगर कोई अपराधी है तो बचेगा नहीं।”
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे, वीआईपी पास या दान राशि के प्रबंधन में प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लग रहे थे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल खड़े किए थे।
मामले की गंभीरता और करोड़ों रामभक्तों की आस्था को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खुद कमान संभाली है। 15 दिनों के भीतर आने वाली SIT की रिपोर्ट पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।








