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छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों का फूटा गुस्सा: रायपुर में निकाला कैंडल मार्च, सरकार को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

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रायपुर 20 जून । छत्तीसगढ़ के चिकित्सा समुदाय ने अपनी लंबित मांगों और हालिया सरकारी फैसलों के विरोध में राजधानी रायपुर में एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार, 19 जून को पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में डॉक्टरों ने हाथों में मोमबत्तियां थामकर शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मुखर तरीके से कैंडल मार्च निकाला।

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जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर, JDA छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस प्रदर्शन में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों सहित चिकित्सा जगत के सैकड़ों चेहरे शामिल हुए।

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मुख्य विवाद: आउटसोर्सिंग और स्थानीय डॉक्टरों के भविष्य का सवाल

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का सबसे बड़ा आक्रोश स्वास्थ्य विभाग के उस फैसले के खिलाफ है, जिसके तहत दूसरे राज्यों से बिना स्थानीय पंजीयन (Registration) के मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग की जा रही है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) डॉक्टरों का साफ कहना है कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं के रोजगार और उनके भविष्य पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ेगा।

“यह आंदोलन सिर्फ स्टाइपेंड बढ़ाने का नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र की गुणवत्ता और स्थानीय युवाओं के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है।” — डॉक्टर्स एसोसिएशन

डॉक्टरों के 4 प्रमुख मांग पत्र

कैंडल मार्च के दौरान चिकित्सकों ने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं:

  1. स्टाइपेंड में वृद्धि: इंटर्न, पीजी, सीनियर रेजिडेंट और सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में तुरंत सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।

  2. आउटसोर्सिंग पर रोक: राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स बुलाने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

  3. स्थानीयता को प्राथमिकता: छत्तीसगढ़ के स्थानीय डॉक्टरों के रोजगार, अधिकारों और चिकित्सा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

  4. बिना पंजीयन प्रवेश पर प्रतिबंध: मेडिकल, नर्सिंग, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल क्षेत्रों में बाहरी राज्यों से बिना स्थानीय पंजीयन के एंट्री बंद हो।

गूंजे नारे, सरकार को दी आखिरी चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने “हमारा हक-हमारी आवाज-हमारा भविष्य”, “Save Local Doctors, Save Our Future” और “Respect Our Work, Respect Our Rights” जैसे गूंजते नारों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई।

JDA और CGDF के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन मांगों पर कोई सकारात्मक और संवेदनशील निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा।

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