नई दिल्ली / पेरिस 20 जून : मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग (आतंकवादी वित्तपोषण) पर लगाम लगाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी वैश्विक संस्था ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (FATF) में भारत का कद बेहद मजबूत हो गया है। इतिहास में पहली बार भारत को FATF की उपाध्यक्षता मिली है। मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी विवेक अग्रवाल को संगठन का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वह केंद्रीय संस्कृति सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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पेरिस बैठक में लगी मुहर: जुलाई 2026 से संभालेंगे कमान
पेरिस स्थित FATF मुख्यालय में आयोजित पूर्ण बैठक (Plenary Meeting) के समापन पर यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। बैठक में सदस्य देशों ने ब्रिटेन की आगामी अध्यक्षता के तहत प्राथमिकताओं को मंजूरी दी और भारत के विवेक अग्रवाल के नाम पर मुहर लगाई।
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कार्यकाल: विवेक अग्रवाल का कार्यकाल जुलाई 2026 से शुरू होकर जून 2027 तक रहेगा।
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किसकी जगह लेंगे: वह ब्रिटेन के जाइल्स थॉमसन का स्थान लेंगे, जो 1 जुलाई 2025 से इस पद पर बने हुए थे।
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चयन प्रक्रिया: FATF के उपाध्यक्ष का चुनाव संगठन के सदस्य देशों के बीच से ही पूर्ण बैठक के जरिए किया जाता है। उपाध्यक्ष का मुख्य काम संगठन के कामकाज को दिशा देने में अध्यक्ष की मदद करना होता है।
नोट: भारत साल 2010 से इस प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संस्था का एक सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य है।
कौन हैं IAS विवेक अग्रवाल? जानिए उनकी ताकत
विवेक अग्रवाल मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के बेहद अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी हैं। उन्हें वित्तीय अपराधों और अंतरराष्ट्रीय नीतियों की गहरी समझ है:
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प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख: वह पूर्व में FATF में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर चुके हैं।
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FIU के पूर्व निदेशक: वह भारत की ‘वित्तीय खुफिया इकाई’ (Financial Intelligence Unit – FIU) के निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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भारत की तारीफ में बड़ी भूमिका: साल 2024 में जब भारत की ‘म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट’ आई थी, तब वह केंद्रीय वित्त मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे। उस रिपोर्ट में FATF ने भारत के एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर-टेररिस्ट फाइनेंसिंग (AML/CFT) ढांचे की जमकर तारीफ की थी।
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भारत के लिए यह ‘बड़ी जीत’ क्यों है?
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ने इस नियुक्ति की सराहना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे भारत की “बड़ी जीत” और एक “ऐतिहासिक नियुक्ति” करार दिया है। इसके पीछे मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
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आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: यह नियुक्ति आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टोलरेंस’ नीति को वैश्विक स्तर पर मजबूती देगी। इससे वैश्विक आतंकी फंडिंग नेटवर्क और अवैध वित्तीय प्रणालियों को ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।
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वैश्विक स्तर पर बढ़ता भरोसा: विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह नियुक्ति दुनिया के 200 से अधिक अधिकार क्षेत्रों (Jurisdictions) में भारत के प्रति बने अटूट भरोसे को दर्शाती है।
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डिजिटल युग की नीतियों में नेतृत्व: डिजिटल पेमेंट और वर्चुअल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी आदि) से उभरने वाले नए वित्तीय जोखिमों पर वैश्विक नीति बनाने में अब भारत की भूमिका और अधिक सक्रिय और निर्णायक होगी।








