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आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “अगर माता-पिता दोनों IAS हैं, तो बच्चों को कोटा क्यों? पीढ़ी-दर-पीढ़ी लाभ से पिछड़े रह जाएंगे असली हकदार”

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क्रीमी लेयर को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत का बड़ा रुख

नई दिल्ली 23 मई : सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लाभ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने ‘क्रीमी लेयर’ (संपन्न वर्ग) के आरक्षण का दायरा सीमित करने और इसका लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाने की वकालत की है।

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मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने स्पष्ट शब्दों में सवाल उठाया कि जो परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह मजबूत हो चुके हैं, उन्हें अभी भी आरक्षण के दायरे में क्यों रखा जाना चाहिए?

“माता-पिता IAS तो बच्चों को क्यों मिले लाभ?” — SC

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक सीधा उदाहरण देते हुए कहा:

“अगर किसी परिवार में माता और पिता दोनों ही IAS अधिकारी हैं, तो उनके बच्चों को सामाजिक या आर्थिक पिछड़ेपन का सामना नहीं करना पड़ता। उन्हें देश की बेहतरीन सुविधाएं और शिक्षा मिलती है। ऐसी स्थिति में, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए?”

अदालत ने आगे जोड़ा कि अगर एक ही संपन्न वर्ग पीढ़ी-दर-पीढ़ी आरक्षण का लाभ उठाता रहेगा, तो यह चक्र कभी खत्म नहीं होगा। इसके कारण उसी श्रेणी के जो लोग आज भी सुदूर गांवों में बेहद पिछड़े और साधनहीन हैं, उन तक आरक्षण का लाभ कभी पहुंच ही नहीं पाएगा।

फैसले और टिप्पणी के मुख्य बिंदु:

  • असली हकदारों तक पहुंचे लाभ: कोर्ट का मानना है कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समानता लाना है। जब एक पीढ़ी मुख्यधारा में आ जाती है और शीर्ष पदों पर पहुंच जाती है, तो अगली पीढ़ी को सामान्य श्रेणी के साथ प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए ताकि पिछड़े वर्ग के अन्य गरीब परिवारों को मौका मिल सके।

  • सशक्तीकरण के बाद बदलाव जरूरी: अदालत ने साफ किया कि आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम हो चुके ‘क्रीमी लेयर’ को आरक्षण से बाहर करना अब समय की मांग है।

  • समानता के सिद्धांत का हवाला: पीठ ने कहा कि यदि संपन्न वर्ग ही बार-बार कोटे का फायदा लेता रहेगा, तो आरक्षण का मूल उद्देश्य (कमजोरों को ऊपर उठाना) ही समाप्त हो जाएगा।

ब्यूरोक्रेसी और राजनीति में हलचल

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर ‘क्रीमी लेयर’ के वर्गीकरण और उप-वर्गीकरण (Sub-categorization) को लेकर बहस तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह टिप्पणी आरक्षण नीतियों में बड़े बदलाव या कड़े नियमों का आधार बन सकती है।

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