Success Story ,रायपुर, 19 मई। छत्तीसगढ़ में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। विशेष रूप से समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित स्वरोजगार एवं ऋण योजनाएं दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड अंबागढ़ चौकी अंतर्गत ग्राम बिहरीकला की निवासी श्रीमती रामकली हल्बा की है, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से सफलता की नई मिसाल कायम की है।
Advt

₹50,000 के ऋण से बदला जीवन
अस्थिबाधित दिव्यांग श्रीमती रामकली हल्बा को वर्ष 2011 में समाज कल्याण विभाग से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ था। इस सहायता राशि से उन्होंने अपने गांव में एक छोटी सी किराना दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुआ यह व्यवसाय, उनकी कड़ी मेहनत और ईमानदारी के बल पर धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।
“आर्थिक कठिनाइयों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मैंने कभी हार नहीं मानी। नियमित मेहनत और ग्राहकों के विश्वास के कारण आज मेरी दुकान गांव में अच्छी तरह स्थापित हो चुकी है और अब मैं अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हूँ।” — श्रीमती रामकली हल्बा
समय से पहले ऋण चुकाकर पाई ‘उत्थान सब्सिडी’
श्रीमती रामकली की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने लगभग डेढ़ से दो वर्षों के भीतर ही पूरा ऋण चुका दिया। समयावधि से पहले ऋण अदायगी करने पर शासन की ओर से उन्हें 3,750 रुपये की उत्थान सब्सिडी भी प्रदान की गई।
‘सुशासन तिहार 2026’ में मिला सम्मान
उनकी यह सफलता आज क्षेत्र के दिव्यांगजनों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। इसी कड़ी में, सुशासन तिहार 2026 के विशेष अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा श्रीमती रामकली हल्बा को समयपूर्व ऋण चुकाने, सफल व्यवसाय संचालन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके संघर्ष और अटूट संकल्प की पहचान बना।
श्रीमती रामकली ने आज आत्मनिर्भर जीवन जीते हुए अन्य जरूरतमंद लोगों से भी अपील की है कि वे शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं, स्वरोजगार अपनाएं और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ें।








