गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहां लॉ (LLB) की एक छात्रा से रेप के आरोप में 9 महीने से जेल में बंद आरोपी को जब जमानत मिली, तो उसके समर्थकों ने जेल के बाहर उसका भव्य स्वागत किया। समर्थकों ने आरोपी को न सिर्फ माला पहनाई और नारेबाजी की, बल्कि गाड़ियों के एक बड़े काफिले के साथ उसका जुलूस भी निकाला। इस शर्मनाक स्वागत का वीडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसकी लोग कड़ी निंदा कर रहे हैं।
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👤 कौन है आरोपी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार रेप का आरोपी सुशील प्रजापति है, जिसे हिंदू युवा वाहिनी का पूर्व नगर अध्यक्ष बताया जा रहा है। आरोपी पिछले 9 महीने से डासना जेल में बंद था और 17 मई 2026 को जमानत पर बाहर आया है। केस दर्ज होने के बाद जब वह फरार चल रहा था, तब पुलिस ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था, जिसके बाद 11 अगस्त 2025 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
📂 क्या है पूरा मामला? (पीड़िता की आपबीती)
गाजियाबाद के मोदीनगर की रहने वाली और मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के साथ प्रैक्टिस करने वाली एलएलबी की छात्रा ने अगस्त 2025 में मुरादनगर थाने में केस दर्ज कराया था। पीड़िता के अनुसार:
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2021 में हुई थी मुलाकात: छात्रा की मुलाकात सुशील प्रजापति से साल 2021 में हुई थी, जिसके बाद आरोपी लगातार फोन पर उससे संपर्क में था।
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मदद के बहाने धोखा: आरोपी ने छात्रा को गाजियाबाद कोर्ट में बैठने का सुझाव दिया और वहां सीट की व्यवस्था कराने का झांसा दिया।
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कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ: आरोपी छात्रा को अपनी थार गाड़ी में बिठाकर एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने छात्रा को यह कहकर कोल्ड ड्रिंक पिलाई कि “वकील साहब आने वाले हैं।”
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बेहोशी की हालत में दुष्कर्म: कोल्ड ड्रिंक पीते ही छात्रा बेहोश हो गई, जिसके बाद सुशील प्रजापति ने उसके साथ दुष्कर्म (रेप) की वारदात को अंजाम दिया।
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जान से मारने की धमकी: होश में आने पर जब छात्रा ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे सड़क पर छोड़ दिया और धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो वह उसे जान से मरवा देगा।
⚖️ हंगामे के बाद हुई थी कार्रवाई
घटना के बाद जब पीड़िता ने हिम्मत दिखाकर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करवाया, तो उस वक्त आरोपी के समर्थन में बजरंग दल और गौरक्ष दल के कार्यकर्ताओं ने मुरादनगर थाने के सामने जमकर हंगामा भी किया था। अब जेल से छूटने के बाद आरोपी का हीरो की तरह स्वागत किए जाने पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।








