सुशासन तिहार में भड़के भाजपा नेता, कलेक्टर से बोले- ‘साहब फोन तो उठा लिया करें, शिविर कोई जादू की छड़ी नहीं’
गरियाबंद 7 मई। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ‘सुशासन’ के दावों के बीच एक बड़ा ही असहज कर देने वाला मामला सामने आया है। अमलीपदर तहसील मुख्यालय में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर के दौरान पूर्व भाजपा संसदीय सचिव और क्षेत्र के वरिष्ठ नेता गोवर्धन मांझी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मंच से ही जिले के आला अधिकारियों और कलेक्टर की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।
कलेक्टर की मौजूदगी में सुनाई खरी-खोटी
जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उइके खुद मौजूद थे, /आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ जिनकी उपस्थिति में मांझी ने प्रशासनिक सुस्ती पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने मंच से सीधे कलेक्टर को संबोधित करते हुए कहा:
“कलेक्टर साहब, आप फोन तो उठा लिया करें। अगर अधिकारी जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना शुरू कर दें, तो जनता की आधी छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान ऐसे ही हो जाएगा। लोग आवेदन दे-देकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों तक उनकी आवाज नहीं पहुँच रही।”
“शिविर कोई जादू की छड़ी नहीं”
गोवर्धन मांझी यहीं नहीं रुके, उन्होंने सरकार के महत्वाकांक्षी शिविरों की सफलता पर भी सवालिया निशान लगा दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सिर्फ पंडाल सजाने और शिविर लगाने से जनसमस्याएं खत्म नहीं होंगी।
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प्रणाली में सुधार जरूरी: उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा भले ही अच्छी हो, लेकिन जब तक सिस्टम नहीं सुधरेगा, तब तक ऐसे आयोजन बेमानी हैं।
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यथार्थ का आइना: मांझी के अनुसार, समाधान शिविर कोई “जादू की छड़ी” नहीं है कि एक बटन दबाते ही सालों पुरानी पानी और बिजली की समस्याएं हल हो जाएं।
खाली कुर्सियों ने बढ़ाई नाराजगी
शिविर में लोगों की कम उपस्थिति और खाली पड़ी कुर्सियों को देखकर पूर्व संसदीय सचिव और भी ज्यादा नाराज नजर आए। / आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज/ उन्होंने प्रशासन पर प्रचार-प्रसार की कमी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन सरकार की मंशा के अनुरूप गंभीरता से काम नहीं कर रहा है। खाली पंडाल इस बात का सबूत है कि जनता का भरोसा सिस्टम से कम हो रहा है।
चर्चा में रहा राजनीतिक घटनाक्रम
मंच से दिए गए इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों के चेहरे उतर गए। एक तरफ जहां भाजपा सरकार सुशासन का जश्न मना रही है, वहीं पार्टी के ही वरिष्ठ नेता द्वारा प्रशासन को इस तरह आईना दिखाने के बाद अब यह मामला पूरे प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।








