पाली/कोरबा 29 अप्रैल 2026 : जहाँ एक ओर लोग बेरोजगारी का रोना रो रहे हैं, वहीं पाली क्षेत्र में एक ‘पेशेवर’ चोर ने अपनी मेहनत और लगन से नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। यह चोर इतना कर्मठ है कि इसे थकान महसूस नहीं होती; एक घर में माल न मिले तो बिना समय गंवाए बगल वाले घर का ताला तोड़ देता है। इसे कहते हैं—”रुकावट के लिए खेद है, पर धंधा जारी है!”
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ताला तोड़ने में ‘पीएचडी’, फुर्ती में ‘सुपरमैन’
इस शातिर चोर की कार्यशैली किसी मल्टीनेशनल कंपनी के टारगेट ओरिएंटेड कर्मचारी जैसी है। इसके लिए ताला तोड़ना कोई अपराध नहीं, बल्कि एक ‘स्किल’ है। अगर किसी घर में घुसने के बाद उसे तिजोरी खाली मिलती है, तो वह निराश होकर घर नहीं लौटता, बल्कि ‘प्रैक्टिस मेक्स ए मैन परफेक्ट’ के मंत्र के साथ तुरंत दूसरे घर का दरवाजा खटखटा (यानी तोड़) देता है। मोहल्ले वाले अब सुबह उठकर चाय की चुस्की के साथ यही चर्चा करते हैं—”आज किसके यहाँ ‘साहब’ पधारे थे?”
चोरियों की ‘सेंचुरी’ की ओर बढ़ते कदम
सूची इतनी लंबी है कि पुलिस डायरी भी छोटी पड़ जाए। बाबूलाल गुप्ता के यहाँ से सोना-चांदी बटोरने से लेकर, शिक्षकों के घरों में ‘निरीक्षण’ करने और पूर्व पार्षद की बाइक पर ‘टेस्ट ड्राइव’ करने तक—इस चोर ने हर वर्ग का ध्यान रखा है। संजू नामदेव वाली गली को तो इस चोर ने शायद अपना ‘हेड ऑफिस’ बना लिया है, जहाँ एक ही रात में तीन-तीन घरों की ‘सर्विसिंग’ कर दी गई।
जनता की रातें काली, चोर की चांदी ही चांदी
पाली के रहवासी अब रात में सोने के बजाय ‘जागते रहो’ का जाप कर रहे हैं, जबकि पुलिस शायद यह सोचकर शांत है कि जब चोर खुद थक जाएगा, तभी रुकेगा। अब देखना यह है कि यह ‘सीरियल ताला-तोड़’ चोर अपनी अगली ‘विजिट’ किस वीआईपी के यहाँ तय करता है या फिर पुलिस अपनी नींद तोड़कर इसके हाथ तोड़ने का कष्ट करेगी।
चेतावनी: पाली क्षेत्र के लोग कृपया अपने ताले थोड़े मजबूत लगाएं, या फिर बाहर बोर्ड लगा दें—”अंदर कुछ नहीं है, समय बर्बाद न करें!”
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