गोधरा 29 अप्रैल 02026 : गुजरात निकाय चुनाव के नतीजों के बीच साम्प्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। गोधरा नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 में मतदाताओं ने जाति और धर्म की दीवारों को गिराकर विकास और योग्यता को चुना है।
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मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में ‘अपेक्षा’ की लहर
गोधरा नगर पालिका के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी निर्दलीय हिंदू महिला उम्मीदवार ने ऐसे क्षेत्र से जीत हासिल की है, जहाँ 100% मतदाता मुस्लिम समुदाय से हैं। निर्दलीय प्रत्याशी अपेक्षाबेन नैनेशभाई सोनी की इस जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।
इस जीत की बड़ी बातें:
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जनादेश का नया मॉडल: अपेक्षाबेन न केवल हिंदू हैं, बल्कि वे इस वार्ड की पंजीकृत मतदाता भी नहीं थीं। इसके बावजूद मुस्लिम मतदाताओं ने उन्हें भारी बहुमत से जिताया।
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योग्यता को सम्मान: स्थानीय लोगों के अनुसार, मतदाताओं ने पारंपरिक धार्मिक ध्रुवीकरण के बजाय एक ऐसे उम्मीदवार को चुना जो उनके वार्ड की समस्याओं को हल करने में सक्षम हो।
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सद्भाव का संदेश: इस नतीजे को गोधरा के राजनीतिक इतिहास में एक ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है, जो समाज में बढ़ते सांप्रदायिक भाईचारे और एकता का प्रतीक है।
गुजरात में भाजपा की ‘प्रचंड’ जीत
जहाँ गोधरा ने सद्भाव की मिसाल पेश की, वहीं पूरे गुजरात में भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा है। कुल 9,900 से अधिक सीटों में से 6,472 सीटें जीतकर भाजपा ने विपक्ष को काफी पीछे छोड़ दिया है। भाजपा ने अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा सहित सभी 15 नगर निगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है।
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