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संजय राउत का तंज: ‘कांग्रेस मुक्त’ का नारा देने वाले मोदी के भाषण में 86 बार कांग्रेस, क्या बिना कांग्रेस नेतृत्व मुमकिन नहीं?

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मुंबई 20 अप्रैल  2026: देश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने बेहद कड़ा और चुटीला पलटवार किया है। राउत ने प्रधानमंत्री के भाषण के बहाने भाजपा की रणनीति और ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

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86 बार कांग्रेस का जिक्र: डर या मजबूरी?

संजय राउत ने प्रधानमंत्री के भाषण का विश्लेषण करते हुए एक दिलचस्प दावा किया। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) उन्होंने कहा कि जो प्रधानमंत्री दुनिया भर में घूम-घूम कर ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का आह्वान करते हैं, उन्होंने देश के नाम दिए गए अपने ताजा संबोधन में 86 बार कांग्रेस का नाम लिया। राउत ने तंज कसते हुए कहा:

“प्रधानमंत्री का भाषण सुनकर ऐसा लगा जैसे उनके दिलो-दिमाग पर कांग्रेस का खौफ बैठा हुआ है। बार-बार कांग्रेस का जिक्र करना इस बात का सबूत है कि देश का नेतृत्व कांग्रेस के बिना संभव ही नहीं है।”

नेतृत्व और विजन पर उठाए सवाल

राउत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रहे हैं। ( आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन राष्ट्र को प्रेरित करने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध और चुनावी भाषण जैसा अधिक लग रहा था। उनके अनुसार, देश की समस्याओं पर बात करने के बजाय कांग्रेस को कोसना अब सरकार की पुरानी आदत बन चुकी है।

महिला आरक्षण पर भाजपा का ‘ढोंग’

संजय राउत ने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित न होने के लिए सरकार की नीयत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के बहाने सीटों का परिसीमन (Delimitation) कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने नाकाम कर दिया। राउत का कहना है कि अगर भाजपा गंभीर होती, तो 2023 में पारित हुए बिल को अब तक लागू कर दिया गया होता।आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

निष्कर्ष

संजय राउत के इस तीखे प्रहार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ‘कांग्रेस’ और ‘महिला आरक्षण’ के मुद्दे पर टकराव और बढ़ेगा। राउत का यह बयान विपक्षी एकजुटता और आगामी चुनावों के लिए एक नया नैरेटिव सेट करने की कोशिश माना जा रहा है।


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