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छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘न्यायिक धमाका’; अमित जोगी को हाई कोर्ट ने दिया सरेंडर का आदेश, जोगी परिवार की मुश्किलें बढ़ीं!

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छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है।

बिलासपुर/रायपुर, 2 अप्रैल 2026 : छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने प्रदेश के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और जेसीसीजे (JCCJ) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उन्हें 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का कड़ा आदेश जारी किया है।

इंसाफ  के लिए सतीश जग्गी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था: करीब 23 साल पहले, 4 जून 2003 को हुई एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या ने पूरे देश को दहला दिया था। निचली अदालत द्वारा 2007 में अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई (CBI) और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद, चीफ जस्टिस की बेंच ने माना कि इस हत्याकांड की साजिश में अमित जोगी की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।

21 दिन का अल्टीमेटम हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अमित जोगी को मिली पिछली राहत कानूनन सही नहीं थी। अदालत ने अब उन्हें 21 दिनों का समय दिया है, जिसके भीतर उन्हें कानून के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। इस फैसले के बाद अन्य 28 दोषियों की उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी गई है।

जोगी परिवार के लिए बड़ा राजनीतिक संकट यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब अमित जोगी अपनी पार्टी को पुनर्जीवित करने की कोशिशों में जुटे थे। सरेंडर के इस आदेश ने न केवल अमित जोगी के व्यक्तिगत भविष्य बल्कि उनकी पार्टी के अस्तित्व पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जग्गी परिवार ने इस फैसले को “सत्य की जीत” बताया है, जबकि जोगी खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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