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सरहद पर नशे की ‘खेती’: बलरामपुर में 2 एकड़ में लहलहा रही थी अफीम, दुर्ग के बाद अब यहां फूटा अवैध कारोबार का भांडा

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बलरामपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबारियों ने अब खेतों को अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। दुर्ग जिले में अफीम की खेती पकड़े जाने के कुछ ही दिनों बाद अब बलरामपुर जिले में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में लगभग दो एकड़ जमीन पर अवैध रूप से उगाई गई अफीम की फसल का पर्दाफाश हुआ है।

मुखबिर की सूचना पर दबिश: प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि त्रिपुरी गांव के एक दुर्गम इलाके में प्रतिबंधित अफीम की खेती की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम गठित की गई। जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। दो एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में अफीम की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी थी।

बाहरी नेटवर्क का हाथ: प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। बताया जा रहा है कि स्थानीय जमीन को लीज (किराये) पर लेकर किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा इस अवैध कारोबार को अंजाम दिया जा रहा था। पुलिस अब उस ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में है जिसने स्थानीय लोगों को झांसा देकर या लालच देकर इस प्रतिबंधित फसल को उगाने का जाल बुना।

कड़ी कानूनी कार्रवाई और फसल का विनाश: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अफीम की खेती एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत पूरी तरह अवैध और दंडनीय अपराध है। प्रशासन ने मौके पर ही अफीम की फसल को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही जमीन मालिक और लीज लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जांच के घेरे में बड़ा सिंडिकेट: दुर्ग और अब बलरामपुर—बैक-टू-बैक दो जिलों में अफीम की खेती मिलने से राज्य का खुफिया तंत्र सतर्क हो गया है। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या छत्तीसगढ़ में अफीम की सप्लाई का कोई अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है? क्या इन दोनों मामलों के तार आपस में जुड़े हुए हैं?

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