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प्रशासन का ‘पावर सेंटर’: मंत्रियों के निज सचिवालय में तैनाती के मायने

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रायपुर छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ शासन के हालिया आदेश में सबसे चर्चा का विषय 12 अधिकारियों की मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निज सचिवालय (Personal Staff) में की गई नई तैनाती है। सचिवालय की इस ‘सर्जरी’ को प्रशासनिक विशेषज्ञ शासन की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

शासन और प्रशासन के बीच की मजबूत कड़ी

मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निज सचिवालय में नियुक्त अधिकारी किसी ‘ब्रिज’ (सेतु) की तरह काम करते हैं। एक ओर जहाँ मंत्री राजनीतिक निर्णयों और जन-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं ये अधिकारी उन निर्णयों को तकनीकी और कानूनी रूप से विभाग तक पहुँचाते हैं। इनकी सक्रियता से ही फाइलों का सफर आसान होता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

नीतिगत क्रियान्वयन में गति

अक्सर मंत्रियों के निर्देश और विभागीय कार्यवाही के बीच एक बड़ा गैप (Antral) देखा जाता है। निज सचिवालय में तैनात अनुभवी अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि मंत्री ने जो घोषणा की है, उसका पालन संबंधित विभाग प्राथमिकता के साथ करे। इससे ‘रेड टेपिज्म’ खत्म होता है और विकास कार्य फाइलों में अटकने के बजाय धरातल पर दिखाई देते हैं।

समन्वय और संकट प्रबंधन

किसी भी विभाग में जब कोई समस्या आती है या अंतर-विभागीय समन्वय की जरूरत पड़ती है, तो ये 12 अधिकारी ही ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हैं। मंत्रियों के निज स्टाफ के रूप में ये अधिकारी सीधे सचिवों और विभागाध्यक्षों से संवाद करते हैं, जिससे विवाद सुलझते हैं और कार्यप्रणाली गतिशील बनी रहती है।

शासन की छवि और पारदर्शिता

इन अधिकारियों की तैनाती से मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) और अन्य मंत्रियों के कार्यालयों की निगरानी और मजबूत होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जन-शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया भी तेज होगी। यह नई संरचना शासन को और अधिक ‘रिस्पॉन्सिव’ और जवाबदेह बनाती है।