Latest News
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से प्रेस क्लब कोरबा के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात, दीं शुभकामनाएं छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल: अगस्त-सितंबर परीक्षा की समय-सारणी जारी, जानें पूरा शेड्यूल कोरबा में दिनदहाड़े सनसनीखेज वारदात: भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष पर जानलेवा हमला, दोनों पैर तोड़े; रज्जाक अली और उसके साथियों पर आरोप..मंत्री लखनलाल देवांगन पहुंचे.. कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश  2026 फीफा वर्ल्ड कप: क्या फुटबॉल फैंस को फिर देखने को मिलेगा ‘मेसी बनाम रोनाल्डो’ का महामुकाबला? छुरी: गणेश तालाब की सफाई के दौरान बड़ा हादसा, जलकुंभी में उलझने से मजदूर की डूबकर मौत JSW Energy का बड़ा धमाका: 1,410 करोड़ रुपये में करेगी छत्तीसगढ़ के मारुति क्लीन कोल का 100% अधिग्रहण
Home » छत्तीसगढ़ » प्रशासन का ‘पावर सेंटर’: मंत्रियों के निज सचिवालय में तैनाती के मायने

प्रशासन का ‘पावर सेंटर’: मंत्रियों के निज सचिवालय में तैनाती के मायने

Share:

रायपुर छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ शासन के हालिया आदेश में सबसे चर्चा का विषय 12 अधिकारियों की मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निज सचिवालय (Personal Staff) में की गई नई तैनाती है। सचिवालय की इस ‘सर्जरी’ को प्रशासनिक विशेषज्ञ शासन की कार्यक्षमता बढ़ाने वाला मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

शासन और प्रशासन के बीच की मजबूत कड़ी

मुख्यमंत्री और मंत्रियों के निज सचिवालय में नियुक्त अधिकारी किसी ‘ब्रिज’ (सेतु) की तरह काम करते हैं। एक ओर जहाँ मंत्री राजनीतिक निर्णयों और जन-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं ये अधिकारी उन निर्णयों को तकनीकी और कानूनी रूप से विभाग तक पहुँचाते हैं। इनकी सक्रियता से ही फाइलों का सफर आसान होता है। आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज।

नीतिगत क्रियान्वयन में गति

अक्सर मंत्रियों के निर्देश और विभागीय कार्यवाही के बीच एक बड़ा गैप (Antral) देखा जाता है। निज सचिवालय में तैनात अनुभवी अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि मंत्री ने जो घोषणा की है, उसका पालन संबंधित विभाग प्राथमिकता के साथ करे। इससे ‘रेड टेपिज्म’ खत्म होता है और विकास कार्य फाइलों में अटकने के बजाय धरातल पर दिखाई देते हैं।

समन्वय और संकट प्रबंधन

किसी भी विभाग में जब कोई समस्या आती है या अंतर-विभागीय समन्वय की जरूरत पड़ती है, तो ये 12 अधिकारी ही ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हैं। मंत्रियों के निज स्टाफ के रूप में ये अधिकारी सीधे सचिवों और विभागाध्यक्षों से संवाद करते हैं, जिससे विवाद सुलझते हैं और कार्यप्रणाली गतिशील बनी रहती है।

शासन की छवि और पारदर्शिता

इन अधिकारियों की तैनाती से मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) और अन्य मंत्रियों के कार्यालयों की निगरानी और मजबूत होगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि जन-शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया भी तेज होगी। यह नई संरचना शासन को और अधिक ‘रिस्पॉन्सिव’ और जवाबदेह बनाती है।

Leave a Comment

latest news