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दंतेवाड़ा में चिकित्सा क्रांति: चूड़ी बेचने वाली शांति को मिला ‘नया घुटना’, जिला अस्पताल में पहली बार हुई सफल नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी

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दंतेवाड़ा/रायपुर | 15 जनवरी 2026: दंतेवाड़ा के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। जिला अस्पताल में पहली बार एडवांस्ड टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इसने साबित कर दिया है कि अब बस्तर के वनांचलों में रहने वाले लोगों को बड़े इलाज के लिए महानगरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा।

दर्द की बेड़ियों से मुक्त हुई शांति

कुआकोंडा के महारापारा की रहने वाली 45 वर्षीय श्रीमती शांति पिछले कई वर्षों से घुटने के असहनीय दर्द से जूझ रही थीं। साप्ताहिक हाट-बाजारों में चूड़ियां बेचकर घर चलाने वाली शांति के लिए चलना-फिरना दूभर हो गया था, जिससे उनकी आजीविका पर भी संकट आ गया था। जिला अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि वे गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित हैं।

मुफ्त इलाज, नई मुस्कान

शांति को 6 जनवरी को भर्ती किया गया और 13 जनवरी को ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम ने उनका सफल ऑपरेशन किया।

“पहले हर कदम पर जान निकलती थी, अब बहुत आराम है,” शांति ने मुस्कुराते हुए अस्पताल प्रबंधन और सरकार का आभार जताया।

सबसे राहत की बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत यह महंगी सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की गई। शांति को इस अत्याधुनिक इलाज के लिए अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा।

दंतेवाड़ा के लिए मील का पत्थर

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, घुटने के क्षतिग्रस्त हिस्से को कृत्रिम इम्प्लांट से बदलकर मरीज की गतिशीलता वापस लाई गई है। एक आदिवासी बहुल और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में प्रशिक्षित सर्जन, एनेस्थीसिया सपोर्ट और नर्सिंग स्टाफ की साझा मेहनत ने इस जटिल सर्जरी को संभव बनाया है।

अब घर के पास ही मिलेगा सुपर स्पेशियलिटी इलाज

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासन की योजनाओं के चलते अब जिले के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट जैसी सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में मिल सकेंगी। दंतेवाड़ा के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसे की जीत है।

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