Naxal Surrender दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ | 09 जनवरी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और प्रशासन को बड़ी सफलता हाथ लगी है। राज्य सरकार के ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइए) अभियान से प्रभावित होकर कुल 63 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
संगठन की कमर टूटी: सचिव ने भी डाले हथियार!
सूत्रों के मुताबिक, इस आत्मसमर्पण में सबसे चौंकाने वाला नाम पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी के सचिव मोहन कड़ती का है। बताया जा रहा है कि मोहन कड़ती ने अपनी पत्नी के साथ पुलिस के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। यदि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि होती है, तो यह नक्सली संगठन के लिए इस दशक का सबसे बड़ा झटका साबित होगा। लंबे समय से सक्रिय रहे कड़ती का सरेंडर होना बस्तर में नक्सली नेटवर्क के ध्वस्त होने का संकेत है।
लोन वर्राटू अभियान का बढ़ता प्रभाव
दंतेवाड़ा पुलिस कार्यालय में दोपहर 2 बजे आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि की विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों के अनुसार:
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सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सघन सर्चिंग ने नक्सलियों को अलग-थलग कर दिया है।
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ग्रामीण इलाकों में पहुंच रही विकास योजनाओं और सरकार की उदार पुनर्वास नीति से नक्सली प्रभावित हो रहे हैं।
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आत्मसमर्पण करने वाले सभी पूर्व कैडरों को सरकार की नीति के तहत तात्कालिक सहायता और पुनर्वास लाभ दिए जाएंगे।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कैडरों के हटने से नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा।








