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CG News: कांग्रेस में ‘सिस्टम’ का करिश्मा.. जिला ने जिसे घर से निकाला, दिल्ली ने उसे राष्ट्रीय मंच पर बिठाया!

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रायपुर/नई दिल्ली: राजनीति में कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अनुशासन और निष्कासन के बीच एक ऐसा विरोधाभास सामने आया है जिसने कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया है। जिला स्तर पर ‘अनुशासनहीन’ मानी गई एक महिला नेत्री  को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने सीधे राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी है।

यह घटनाक्रम अब पार्टी के भीतर चर्चा का केंद्र बन गया है कि क्या दिल्ली और जिला कमेटी के बीच तालमेल की भारी कमी है, या फिर ‘बगावत’ ही अब पद पाने का नया फॉर्मूला बन गया है?

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि जिला कांग्रेस कमेटी ने 5 फरवरी 2025 को एक कड़ा आदेश जारी किया था। इसमें एक महिला नेत्री पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाकर निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करने और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा था। अनुशासन का डंडा चलाते हुए उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।

कार्यकर्ताओं के तीखे सवाल

AICC के इस नए आदेश ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं के बीच असंतोष पैदा कर दिया है। गलियारों में कुछ कड़वे सवाल तैर रहे हैं:

  • नियमों में दोहरापन: क्या कांग्रेस में अनुशासन के नियम जिलों के लिए अलग और दिल्ली के लिए अलग हैं?

  • निष्कासन की अहमियत: अगर 6 साल का निष्कासन महज कुछ महीनों में खत्म हो सकता है, तो फिर ऐसी कार्रवाई का डर किसे रहेगा?

  • अनुशासन बनाम बगावत: क्या पार्टी अब अनुशासन तोड़ने वालों को पुरस्कृत कर रही है?

  • बीजेपी नेता का बयान: “कांग्रेस में सिर-फुटव्वल की स्थिति है। जो नेता अपने जिले में स्वीकार्य नहीं है, उसे दिल्ली में सिर पर बिठाया जा रहा है। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के पास न तो कोई नीति है और न ही नियत। बगावत को इनाम देना ही अब इनका कल्चर बन चुका है।”

यह मामला कांग्रेस की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है कि क्या वाकई पार्टी के पास अपने निष्कासित नेताओं का कोई ‘सेंट्रल डेटाबेस’ है या फिर सिफारिशें नियमों पर भारी पड़ रही हैं।