नई दिल्ली | विशेष संवाददाता : नए साल की दस्तक के साथ ही देश के लगभग 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों के लिए उत्साह दोगुना हो गया है। 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त होने में अब महज कुछ ही दिन शेष हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतनमान लागू कर सकती है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के बयानों ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई संभालेंगी कमान
सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन कर जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया है। आयोग ने आधिकारिक तौर पर अपना काम शुरू कर दिया है और ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) भी जारी कर दिए गए हैं। 8 दिसंबर 2025 को संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि 3 नवंबर 2025 के संकल्प के माध्यम से आयोग की रूपरेखा अधिसूचित की जा चुकी है।
वेतन में 35% तक उछाल की उम्मीद
8वें वेतन आयोग की सबसे खास बात फिटमेंट फैक्टर में होने वाली बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
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फिटमेंट फैक्टर: इसे 2.57 से बढ़ाकर 2.86 किया जा सकता है।
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न्यूनतम वेतन: वर्तमान ₹18,000 से बढ़कर ₹34,500 से ₹41,000 के बीच पहुंच सकता है।
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पेंशनर्स को लाभ: लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों की पेंशन में भी इसी अनुपात में सम्मानजनक वृद्धि होगी।
भत्तों में होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
7वें वेतन आयोग की तर्ज पर इस बार भी सरकार कई भत्तों को तर्कसंगत बनाने की तैयारी में है।
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विलय और समाप्ति: पुराने पड़ चुके लिपिकीय या टाइपिंग भत्तों को समाप्त किया जा सकता है।
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समीक्षा: यात्रा भत्ता (TA), मकान किराया भत्ता (HRA) और महंगाई भत्ते (DA) की दरों को मौजूदा महंगाई दर के हिसाब से संशोधित किया जाएगा।
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परफॉरमेंस लिंक इंसेंटिव: चर्चा है कि इस बार कर्मचारियों के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
क्यों जरूरी है 8वां वेतन आयोग?
आमतौर पर हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन होता है ताकि जीवन यापन की बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति (Inflation) के अनुसार कर्मचारियों के वेतन का तालमेल बिठाया जा सके। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, जिसकी समय सीमा दिसंबर 2025 में पूरी हो रही है।
“आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हो चुका है और वित्त मंत्रालय ने इसकी समयसीमा व कार्यक्षेत्र को मंजूरी दे दी है।” > — पंकज चौधरी, वित्त राज्य मंत्री (संसद में दिए गए बयान के अनुसार)
निष्कर्ष
यह ₹41,000 का आंकड़ा पूरी तरह से संभावित (Expected) है। सरकारी मुहर तभी लगेगी जब जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा (जिसके लिए उन्हें 18 महीने का समय दिया गया है)।








