Latest News
भारत की थाली का सच: क्या भारत केवल शाकाहारी देश है? BRICS डिनर, राहुल गांधी का दावा और भारतीय खान-पान का इतिहास कैल्शियम स्कोर सही, तो भी दिल की बीमारी का खतरा? जानिए क्या कहती है 10 साल की यह नई रिसर्च कोरबा में आसमान में दिखा अद्भुत नजारा: अर्धचंद्र के ऊपर चमका बेहद खूबसूरत तारा, जानें क्या है इसका खगोलीय सच बालको मेडिकल सेंटर के चौथे वार्षिक बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव में शामिल होंगे देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञ गणेशोत्सव से पहले कोरबा पुलिस का बड़ा एक्शन: एक ही दिन में 105 अपराधियों पर कार्रवाई, 60 वारंटी भेजे गए जेल अंबिकापुर में छात्र नेता की प्रताड़ना से तंग आकर छात्रा ने की आत्महत्या, आरोपी गिरफ्तार; कांग्रेस ने पार्टी से किया निलंबित
Home » राजनीति » अटल जी के नाम पर कैसा ‘सन्नाटा’? खाली कुर्सियां और अपनों की अनदेखी… क्या यही था अटल परिसर का उद्घाटन?

अटल जी के नाम पर कैसा ‘सन्नाटा’?  खाली कुर्सियां और अपनों की अनदेखी… क्या यही था अटल परिसर का उद्घाटन?

Share:

कोरबा/कटघोरा, छत्तीसगढ़। भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर आयोजित ‘अटल परिसर’ का लोकार्पण कार्यक्रम कटघोरा में विवादों के घेरे में आ गया है। जहाँ एक ओर राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय वर्चुअल माध्यम से प्रदेश को नई सौगातें दे रहे थे, वहीं कटघोरा नगर पालिका परिसर में आयोजित कार्यक्रम ‘जनभागीदारी’ के अभाव में पूरी तरह बेअसर साबित हुआ। कार्यक्रम स्थल पर बिछी खाली कुर्सियां आयोजन की विफलता की कहानी खुद बयां कर रही थीं।

आमंत्रण में ‘कंजूसी’, प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि आयोजन समिति ने नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों से दूरी बनाए रखी। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे सार्वजनिक आयोजनों में सभी वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधियों और संभ्रांत नागरिकों को ससम्मान आमंत्रित किया जाए। लेकिन कटघोरा में इस अनिवार्य प्रक्रिया को ताक पर रख दिया गया, जिससे कार्यक्रम केवल एक ‘सरकारी औपचारिकता’ बनकर रह गया।

वार्ड पार्षद की अनदेखी ने सुलगाई विवाद की चिंगारी

 हैरानी की बात यह रही कि जिस वार्ड में अटल चौक और परिसर का निर्माण हुआ, उसी क्षेत्र के निर्वाचित पार्षद को न तो व्यक्तिगत निमंत्रण दिया गया और न ही आमंत्रण पत्र में उनका नाम सम्मानजनक तरीके से प्रकाशित कराया गया। हालांकि कार्ड पर औपचारिकता के लिए ‘समस्त पार्षद’ लिख दिया गया था, लेकिन नाम गायब होने से पार्षदों और कार्यकर्ताओं में गहरा रोष व्याप्त है।

जन-जन के नेता के अपमान का आरोप

नगरवासियों का कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी दलीय राजनीति से ऊपर, जन-जन के प्रिय नेता थे। उनके नाम पर होने वाले गरिमामय आयोजन को संकीर्ण मानसिकता और लापरवाही की भेंट चढ़ा देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बड़ा सवाल: क्या यह आयोजन सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए था? क्या आयोजकों की आपसी गुटबाजी या लापरवाही के कारण ही जनता ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली?

फिलहाल, खाली कुर्सियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं और नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं। अटल परिसर के उद्घाटन की यह ‘खामोशी’ आने वाले दिनों में नगर की राजनीति में बड़ा शोर मचा सकती है।

Leave a Comment

latest news