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कांकेर में सुलग उठी हिंसा की आग: शव दफनाने पर छिड़ा संग्राम, चर्च में आगजनी और ASP समेत 20 पुलिसकर्मी घायल; लगा कर्फ्यू

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Violence erupts in Kanker: A dispute over a burial leads to clashes, arson at a church, and injuries to 20 police officers, including an ASP; curfew imposed.

अंतागढ़/कांकेर | छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत कांकेर जिले का अमाबेड़ा इलाका गुरुवार को रणक्षेत्र बन गया। आदिवासी और ईसाई समुदाय के बीच धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से सुलग रही चिंगारी ने हिंसक रूप ले लिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उग्र भीड़ ने चर्च में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया। इस झड़प में अंतागढ़ के एडिशनल एसपी (ASP) आशीष बंचोर सहित 20 से अधिक जवान घायल हो गए हैं। प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए इलाके में तत्काल प्रभाव से कर्फ्यू लागू कर दिया है।

विवाद की जड़: निजी जमीन पर दफनाया गया शव

मामले की शुरुआत 16 दिसंबर को हुई, जब गांव के सरपंच (जो धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं) के पिता चामरा राम सलाम की मृत्यु हो गई। परिजनों ने शव को गांव में ही अपनी निजी जमीन पर ईसाई रीति-रिवाज से दफना दिया।

आदिवासी समुदाय ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि मृतक ने धर्म परिवर्तन कर लिया था, इसलिए उन्हें गांव की सीमा में दफन करना स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के खिलाफ है। ग्रामीणों की मांग थी कि शव को कब्र से बाहर निकाला जाए।

आदेश के बाद भड़की हिंसा, पुलिस पर हमला

तनाव को देखते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने शव को बाहर निकालने का आदेश दिया। लेकिन प्रक्रिया के दौरान ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि:

  • चर्च में आगजनी: आक्रोशित भीड़ ने एक स्थानीय चर्च को आग के हवाले कर दिया।

  • पत्थरबाजी: दोनों गुटों के बीच जमकर पत्थर चले। बीच-बचाव करने पहुंची पुलिस टीम पर भी हमला किया गया।

  • घायल: ASP आशीष बंचोर और 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी इस हिंसा में लहूलुहान हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय मेडिकल सेंटर में जारी है।

सरकार और प्रशासन का रुख

राज्य सरकार ने इस घटना को बेहद संंवेदनशील माना है। मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

  • भारी बल की तैनाती: बस्तर रेंज के आईजी (IG), डीआईजी (DIG), कांकेर कलेक्टर और एसपी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं।

  • सख्त कार्रवाई के निर्देश: सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है।

  • शांति की अपील: प्रशासन स्थानीय प्रमुखों और दोनों समुदायों के बुजुर्गों के साथ बैठक कर रहा है ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल अंतागढ़ और अमाबेड़ा के प्रभावित इलाकों में सन्नाटा पसरा है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

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