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21 वर्ष बाद कोरबा में मुनि संघ का मंगल प्रवेश: क्षमा का दिव्य संदेश.. कहा विश्व में क्षमा से बढ़कर कुछ नहीं

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कोरबा, छत्तीसगढ़ (7 दिसंबर, 2025): महा­समाधि धारक परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के दीक्षित और परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती परंपरा के शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में अहिंसा रक्षा पदयात्रा निरंतर जारी है।

इसी क्रम में, 6 दिसंबर 2025 को मुनि संघ का मंगल प्रवेश श्री दिगंबर जैन मंदिर, कोरबा (छत्तीसगढ़) में हुआ। लगभग 21 वर्षों (वर्ष 2003 के बाद) के लंबे अंतराल के बाद मुनि संघ के आगमन से पूरे जैन समाज में हर्ष और उल्लास छा गया। नगर के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने मुनि संघ का पादप्रक्षालन और भव्य स्वागत-अभिनंदन किया।

पदयात्रा में नरेंद्र जैन सिवनी (यात्रा प्रभारी), दीपक जैन, नमन जैन, रानु जैन नोहटा सहित अनेक श्रद्धालु सम्मिलित रहे। ज्ञातव्य है कि मुनि संघ का पदविहार श्री सम्मेद शिखर जी की ओर चल रहा है। इस विहार में सिवनी, कटंगी, गुना एवं कोरबा जैन समाज के अनेक महानुभाव अपनी श्रद्धा समर्पित कर रहे हैं।

धर्मसभा में मुनि श्री भावसागर जी महाराज का उद्बोधन: क्षमा ही जीवन उत्थान का मार्ग

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा:

  • “विश्व में क्षमा से बढ़कर कुछ नहीं। सच्ची क्षमा वही है जहाँ स्वार्थ का स्थान न हो।”

  • क्षमा से मनुष्य फूल-सा हल्का हो जाता है, जबकि क्रोध मनुष्य को विषाक्त करता है।

  • उन्होंने बताया कि क्रोध की दोहरी तलवार सदैव मान–अभिमान के द्वार पर खड़ी रहती है।

  • क्षमा वहीं मांगनी चाहिए जहाँ मन नहीं मिलता, क्योंकि वहीं उसका वास्तविक मूल्य है।

  • क्षमा न करने से मनुष्य तनावग्रस्त हो जाता है।

  • भारत को एक ऐसा राष्ट्र बताया जिसने सदैव शत्रु की भूलों को भी क्षमा किया है, और हमारे देश में युद्ध शौक से नहीं, मजबूरी में लड़े जाते हैं।

महाराज श्री ने आगे कहा कि क्रोध के समय ग्रंथियों से विषैला द्रव पूरे शरीर में फैल जाता है, जिससे हृदय संबंधी रोग और ब्लड प्रेशर जैसी अनेक बीमारियां जन्म लेती हैं।

उन्होंने क्षमा को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया:

  • जीवन उत्थान का मार्ग

  • खुशहाली का खजाना

  • मोक्ष का द्वार

  • आत्मा का आनंद

  • महान तप और ऊँचा आचरण

उन्होंने जोर देकर कहा: “क्रोध को जीतने का उपाय केवल क्षमा है, और क्षमा की कभी पराजय नहीं होती।”

मुनि श्री ने आज की भागदौड़ और चुनौतियों के समय में जैन धर्म के सिद्धांतों पर चलकर व्यक्ति स्वयं का और राष्ट्र का निर्माण किस प्रकार कर सकता है, इस पर भी प्रेरक मार्गदर्शन दिया।

 कोरबा जैन समाज का सौभाग्य

जैन समाज कोरबा के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जैन ने कहा कि लगभग 21 वर्षों बाद मुनि संघ का आगमन होना पूरे कोरबा जैन समाज के लिए सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने गुरुदेव का आशीर्वाद एवं उनकी सेवा का अद्वितीय अवसर मिलना अत्यंत गौरव की बात बताया।

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