Russian President Vladimir Putin’s visit to India: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोटोकॉल तोड़कर किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के कारण यह सोशल मीडिया पर भी छा गया।

भारत में सामान्यतः विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत मंत्री-स्तर के प्रतिनिधि करते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर इस परंपरा को बदला है, जो उनकी व्यक्तिगत और प्रभावी कूटनीतिक शैली का अभिन्न अंग बन चुका है।
क्रेमलिन भी हुआ हैरान! पीएम मोदी के इस कदम की अप्रत्याशितता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने भी कहा कि विमान रैंप पर पुतिन से मिलने का मोदी का फैसला अप्रत्याशित था और रूसी पक्ष को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।
किन-किन नेताओं के लिए टूटा प्रोटोकॉल?
पीएम मोदी द्वारा प्रोटोकॉल तोड़ने की यह पहली घटना नहीं है। यह उनकी विदेश नीति का एक ख़ास तरीका बन चुका है, जिससे वह वैश्विक नेताओं के प्रति व्यक्तिगत सम्मान और जुड़ाव व्यक्त करते हैं:
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2016: अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद के आगमन पर पीएम मोदी स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे।
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2020: तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम के लिए भारत आगमन पर पीएम मोदी विमान के पास जाकर स्वागत करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
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2018: फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के लिए भी यही परंपरा निभाई गई।
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2017: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को भी मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर रिसीव किया था।
विमान से उतरते ही पुतिन को लगाया गले..दोनों ताकतवर नेता एक ही गाड़ी में बैठकर प्रधानमंत्री आवास पर होने वाले प्राइवेट डिनर के लिए रवाना हुए
रूसी राष्ट्रपति पुतिन के विमान से उतरते ही, सबसे पहले पीएम मोदी से हाथ मिलाया। पीएम मोदी ने उन्हें गर्मजोशी से गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद दोनों ताकतवर नेता एक ही गाड़ी में बैठकर प्रधानमंत्री आवास पर होने वाले प्राइवेट डिनर के लिए रवाना हो गए। रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद पुतिन का यह पहला भारत दौरा था, और शुरुआती पलों में ही दोनों नेताओं के बीच की गहरी दोस्ती दुनिया ने साफ़ महसूस की।
यह स्पष्ट है कि पीएम मोदी की कूटनीतिक शैली में व्यक्तिगत जुड़ाव और वैश्विक नेताओं के प्रति सम्मान भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी हिस्सा बन चुका है।








