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सवा रुपए की बख्शीश से बोनस की शुरुआत.. कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण के बाद बढ़ता गया बोनस..22 सितंबर को दिल्ली में बैठक

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कोयला खदानों में राष्ट्रीयकरण से पहले निजी खान मालिकों द्वारा दुर्गापूजा पर कोयला मजदूरों को सवा रुपए की बख्शीश देने की परंपरा थी। यही बख्शीश आज बोनस के रूप में बदल गई है, जो कोयला क्षेत्र में एक प्रमुख आकर्षण है। इस वर्ष बोनस का बजट लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये होने की संभावना है।

सवा रुपए की बख्शीश 

बता दे कि निजी मालिकों के दौर में कोलियरियों में काम करने के लिए मजदूर नहीं मिलते थे। खनन को खतरनाक माना जाता था। हादसे भी बहुत होते थे। दुर्गा पूजा में मजदूर भाग नही जाए, इसलिए पूजा से ठीक पहले बख्शीश दी जाती थी। बख्शीश पाने के लिए मजदूर रुक जाते थे। यही बख्शीश राष्ट्रीयकरण के बाद बोनस के रूप में भुगतान किया जाने लगा। खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया तो बोनस का आकर्षण बढ़ने लगा। हर साल बोनस में वृद्धि होने लगी।

बोनस की राशि में वृद्धि

पिछले 15 वर्षों में बोनस की राशि में काफी वृद्धि हुई है। 2011 में जहां बोनस 21,000 रुपये था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 93,750 रुपये हो गया। इस वर्ष भी बोनस में वृद्धि की संभावना है, और 22 सितंबर को दिल्ली में कोल इंडिया मानकीकरण समिति की बैठक में इस पर निर्णय होना है।

बोनस भुगतान की तिथि

इस वर्ष बोनस का भुगतान 9 अक्टूबर से पहले किया जा सकता है, जैसा कि पिछले वर्ष हुआ था। ठेका मजदूरों को भी दीपावली से पहले बोनस की राशि का भुगतान किया जा सकता है ।

कोल इंडिया में बोनस का रिकॉर्ड, कब कितना दिया गया

– 2011: 21,000 रुपये
– 2012: 26,000 रुपये
– 2013: 31,500 रुपये
– 2014: 40,000 रुपये
– 2015: 48,500 रुपये
– 2016: 54,000 रुपये
– 2017: 57,000 रुपये
– 2018: 60,500 रुपये
– 2019: 64,700 रुपये
– 2020: 68,500 रुपये
– 2021: 72,500 रुपये
– 2022: 76,500 रुपये
– 2023: 85,500 रुपये
– 2024: 93,750 रुपये

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