एम्स गोरखपुर की निदेशक डॉ. विभा दत्ता के निजी अस्पताल में इलाज कराने की खबर पर आया स्पष्टीकरण, जानिए क्या है पूरा मामला
गोरखपुर 30/10/2026:एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के निजी अस्पताल में इलाज कराने की हालिया खबरों के बाद अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों पर अब उनका आधिकारिक बयान सामने आया है। ‘टीवी9 भारतवर्ष’ से बातचीत करते हुए डॉ. विभा दत्ता ने इन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया है।

डॉ. विभा दत्ता ने स्पष्ट किया कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर उनके सहकर्मियों को दिल से जुड़ी किसी गंभीर समस्या का अंदेशा हुआ। चूंकि उस वक्त कैथ लैब की जरूरत पड़ सकती थी और एम्स गोरखपुर में कैथ लैब का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, इसलिए एहतियातन उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया था।
उन्होंने आगे बताया, “प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टरों ने मेरी टेस्ट रिपोर्ट देखी, जो पूरी तरह सामान्य थी। उन्होंने किसी प्रकार का इलाज या भर्ती नहीं किया और हम महज आधे घंटे के भीतर वहां से वापस लौट आए।”
एम्स गोरखपुर में कैथ लैब को लेकर दी जानकारी
निदेशक ने एम्स में कैथ लैब की अनुपलब्धता और इसके निर्माण कार्य पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि कैथ लैब कोई छोटा सेटअप नहीं है और इसमें उपयोग होने वाले उपकरण बेहद महंगे तथा अत्याधुनिक होते हैं। इसके लिए उन्होंने मंत्रालय से 14 से 15 करोड़ रुपये के विशेष बजट की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिल चुकी है।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में गोरखपुर के किसी भी सरकारी अस्पताल में कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन एम्स में इसकी स्थापना का काम अंतिम चरण में है और दिसंबर 2026 तक यह पूरी तरह से शुरू हो जाएगी। इसके बाद एंजियोप्लास्टी, स्टंट और पेसमेकर लगाने जैसी सभी एडवांस कार्डियक सुविधाएं एम्स में ही मिलने लगेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्डियोलॉजी से जुड़ी अन्य सभी आवश्यक जांचों की व्यवस्था एम्स गोरखपुर में पहले से ही पूरी तरह से उपलब्ध है।




