नई दिल्ली 29 अक्टूबर 2026: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बयान पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब नसीरुद्दीन शाह ने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में एक वीडियो जारी किया और खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया।
भाटिया ने शाह के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए 1999 की मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘सरफरोश’ का उदाहरण दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“जिसे हम एसीपी राठौड़ समझे थे, वह असल जिंदगी में गुलफाम हसन निकला।”
गौरतलब है कि फिल्म ‘सरफरोश’ में आमिर खान ने ईमानदार पुलिस अधिकारी एसीपी अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था, जबकि नसीरुद्दीन शाह ने ‘गुलफाम हसन’ की भूमिका निभाई थी—जो कि एक पाकिस्तानी गजल गायक के रूप में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल जासूस था।
नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था?

नसीरुद्दीन शाह ने जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए एक वीडियो मैसेज साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने सरकार की नीतियों और रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि आलोचकों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ या ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का टैग दे दिया जाता है।
वो कहते हैं, ‘मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।’
उन्होंने आगे कहा, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे? तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?’
इसके अलावा, शाह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और जामिया के छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों के साथ किया गया बर्ताव भुलाया नहीं जा सकता।
क्या है जामिया मिलिया इस्लामिया का विवाद?
जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव (Students’ Union Elections) को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में:
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छात्र संघ चुनाव दोबारा कराना।
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यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना।
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आंदोलन में शामिल छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना।
मांगों के न माने जाने पर कुछ छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।



