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शोक में डूबा कला जगत: विश्वविख्यात पंडवानी गायिका पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया गहरा दुख

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रायपुर (5 जुलाई 2026): भारत की लोक कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अमिट पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका, पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई का आज दुखद निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की खबर आते ही पूरे देश के कला, संस्कृति और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. तीजन बाई का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्त की गहरी संवेदना, कहा- “अपूरणीय क्षति”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा करते हुए डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी।

“सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला को अपनी भव्य, अद्वितीय और ओजस्वी प्रस्तुति से न सिर्फ देश के कोने-कोने में पहुंचाया, बल्कि पूरी दुनिया में इसे एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना भारत के कला, संगीत और लोक संस्कृति जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक नहीं की जा सकती।” — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

पीएम मोदी ने इस कठिन घड़ी में तीजन बाई के शोकाकुल परिजनों और देश-विदेश में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के तमाम बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक दिग्गजों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

सीएम विष्णु देव साय पहुंचे एम्स, दी भावभीनी श्रद्धांजलि

निधन की खबर मिलते ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तुरंत एम्स रायपुर पहुंचे। उन्होंने डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों से भेंट कर बंधाया ढांढस।

मुख्यमंत्री साय ने कहा:

“डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से पंडवानी को विश्व पटल पर स्थापित किया और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”

प्रदेश के उद्योगमंत्री लखनलाल देवांगन ने भी इस दुखद घड़ी में अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

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सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर तय किया ‘कपालिक शैली’ से वैश्विक मंच तक का सफर

पारंपरिक लोक कला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में डॉ. तीजन बाई की ऐतिहासिक भूमिका रही है। उन्होंने उस दौर में पंडवानी की ‘कपालिक शैली’ (मंच पर खड़े होकर और घूमकर प्रदर्शन करना) को अपनाया, जब इस कला को पूरी तरह से पुरुष कलाकारों तक ही सीमित माना जाता था और महिलाओं के लिए कड़े सामाजिक प्रतिबंध थे।

अपनी दमदार और ओजस्वी आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत के प्रसंगों व पात्रों को जीवंत करने की उनकी अनूठी शैली ने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनका जाना लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम युग का अंत है।

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