खास बातें:
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चुनावी बिसात: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने अभी से कसी कमर।
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देसी अंदाज: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर कुर्सियां छोड़ चारपाई (खाट) पर बैठे दिग्गज।
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खास मेहमान: बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व यूपी प्रभारी नितिन नवीन के दो दिवसीय लखनऊ दौरे के बीच हुई अहम बैठक।

लखनऊ, 5 जुलाई। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी रणनीति को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में रविवार को राजधानी लखनऊ में एक बेहद दिलचस्प और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नजारा देखने को मिला, जब सूबे के और केंद्र के शीर्ष नेता चाक-चौबंद दफ्तरों को छोड़कर एक ग्रामीण परिवेश वाली ‘खाट पंचायत’ में तब्दील हो गए।
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डिप्टी सीएम के आवास पर सजी ‘खाट पंचायत’
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के प्रभारी नितिन नवीन अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे पर हैं। दौरे के दौरान वह रविवार को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पहुंचे। यहाँ बैठक के लिए कोई हाई-टेक कॉन्फ्रेंस रूम या आलीशान कुर्सियां नहीं लगाई गई थीं, बल्कि पूरा माहौल ग्रामीण भारत की चौपाल जैसा तैयार किया गया था।
बैठक की सबसे खास बात यह रही कि सभी नेता खाट (चारपाई) पर बैठकर बिल्कुल अनौपचारिक और पारंपरिक पंचायत के अंदाज में बातचीत करते नजर आए। कड़कती राजनीतिक चर्चाओं के बीच नेताओं ने मलीहाबादी आम का स्वाद भी लिया।
बैठक में शामिल रहे ये बड़े चेहरे
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर आयोजित इस अनौपचारिक लेकिन बेहद गंभीर बैठक में उत्तर प्रदेश की राजनीति के तमाम सूरमा एक साथ नजर आए:
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योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
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नितिन नवीन (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व यूपी प्रभारी, भाजपा)
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ब्रजेश पाठक व केशव प्रसाद मौर्य (दोनों उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
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बी.एल. संतोष (राष्ट्रीय संगठन महामंत्री, भाजपा)
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धर्मपाल सिंह (प्रदेश संगठन महामंत्री, भाजपा)
इसके अलावा पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी भी इस खास चौपाल का हिस्सा बने।
【 मिशन 2027 का नया समीकरण 】
सड़क से लेकर संगठन तक,
कार्यकर्ताओं को सीधे जोड़ने
और 'देसी कनेक्ट'के जरिए
जनता का दिल जीतने की तैयारी।
चर्चा के मुख्य बिंदु: पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के अनुभवों का निचोड़
इस बैठक का माहौल औपचारिक कम और संवादात्मक अधिक रहा। इस दौरान नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ भी विशेष संवाद किया।
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संगठनात्मक अनुभव का लाभ: पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने अपने-अपने कार्यकाल के जमीनी अनुभवों को साझा किया।
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बदलते माहौल की रणनीति: बदलते राजनीतिक परिदृश्य और विपक्ष की घेराबंदी के बीच संगठन को बूथ स्तर पर कैसे अभेद्य बनाया जाए, इस पर गहन मंथन हुआ।
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जनसंवाद पर जोर: पुराने दौर की यादें ताजा करते हुए नेताओं ने सहमति जताई कि जनता के बीच जाकर सीधे संवाद (जैसे खाट पंचायत) स्थापित करने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है।
सियासी गलियारों में चर्चा: क्या है इस ‘खाट’ का संदेश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की इस ‘चारपाई पंचायत’ के पीछे एक बड़ा रणनीतिक संदेश छिपा है।
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जनभागीदारी और पारदर्शिता: बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि वह जमीन से जुड़ी पार्टी है और उसके फैसले बंद कमरों के बजाय लोकतांत्रिक और सहज संवाद से होते हैं।
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देसी कनेक्ट: ग्रामीण परिवेश की पहचान मानी जाने वाली चारपाई के जरिए पार्टी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण वोट बैंक और आम जनता को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि नेतृत्व उनके कितना करीब है।
मिशन 2027 को फतह करने के लिए बीजेपी का यह ‘आम’ स्वाद और ‘खास’ अंदाज आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित हो सकता है।







