ठाणे 1 जुलाई :
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मौजूदा रणनीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। ठाणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि विरोधी दलों को पूरी तरह खत्म करने की राजनीति आने वाले समय में खुद भाजपा पर ही भारी पड़ने वाली है। राज ठाकरे ने दावा किया कि विपक्ष को कमजोर करने की इस होड़ का नतीजा यह होगा कि पार्टी के अंदर ही बगावत के सुर उठने लगेंगे और इसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है।
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“सवाल खरीदने वाले का नहीं, बिकने वाले का है”
मौजूदा दौर की राजनीति को ‘गंदी और भयावह’ बताते हुए मनसे प्रमुख ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग हुए विधायकों और सांसदों पर जमकर निशाना साधा। दल-बदल करने वाले नेताओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा:
“आज सवाल यह नहीं है कि कौन खरीद रहा है, बल्कि यह है कि कौन बिकने के लिए तैयार खड़ा है। अगर लोग खुद को बेचने के लिए तैयार हैं, तो खरीदार तो हमेशा मिल ही जाएंगे।”
उन्होंने चिंता जताई कि आज जो राजनीतिक संस्कृति देश में विकसित हो रही है, उसका बहुत बुरा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि राजनेताओं को इस बात का अंदाज़ा ही नहीं है कि वे कैसी गलत परंपराएं स्थापित कर रहे हैं।
“ताश के पत्तों जैसी है भाजपा की ताकत”
भाजपा के सांगठनिक ढांचे पर बात करते हुए राज ठाकरे ने इसकी तुलना ताश के पत्तों से बने महल से की। उन्होंने कहा कि भाजपा की पूरी संरचना सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर टिकी हुई है। यदि इस ढांचे का मुख्य आधार हट गया, तो पूरी इमारत को ढहने में वक्त नहीं लगेगा।
अमित शाह की रणनीति और ‘प्लान बी’ पर उठाया सवाल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को तोड़ने के पीछे भविष्य की एक सोची-समझी राजनीति है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब शिवसेना या तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी पार्टियों के सांसद-विधायक टूटते हैं, तो उन्हें सीधे भाजपा में शामिल करने के बजाय एक अलग गुट के रूप में क्यों रखा जाता है?
मनसे प्रमुख के मुताबिक, यह भाजपा का ‘प्लान बी’ है। भविष्य में यदि प्रधानमंत्री पद के नेतृत्व को लेकर भाजपा के भीतर कोई आंतरिक मतभेद या खींचतान पैदा होती है, तो इन बाहरी और अलग हुए गुटों का इस्तेमाल समर्थन जुटाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब आप बाहरी विपक्ष को खत्म करते हैं, तो कुदरती तौर पर आपके अपने घर के भीतर ही नए विरोधी पैदा होने लगते हैं।







