“टैक्स चुकाना एहसान नहीं, कानूनी मजबूरी है; कंपनी बताए कि कोरबा को क्या मिला?”
कोरबा 30 जून। वेदांता-बालको द्वारा पिछले 10 वर्षों में सरकारी खजाने में 5 लाख करोड़ रुपये का योगदान देने के हालिया विज्ञापन अभियान पर छत्तीसगढ़ में सियासत गरमा गई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता जयसिंह अग्रवाल ने इस दावे पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि टैक्स चुकाना किसी भी कंपनी की वैधानिक बाध्यता है, न कि जनता पर कोई एहसान या परोपकार।
Advt

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए उन्होंने मांग की है कि कंपनी करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर फूंकने के बजाय कोरबा की जनता के सामने ‘व्हाइट पेपर’ (श्वेत पत्र) जारी कर अपने वादों का वास्तविक हिसाब दे।
## मुख्य आपत्तियां और बड़े सवाल
1. “कोरबा की कीमत पर समृद्धि, लेकिन कोरबा को क्या मिला?”
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि कंपनी ने सरकार को कितना टैक्स दिया। बड़ा सवाल यह है कि जिस कोरबा की जमीन, खदानों और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया गया, उस कोरबा को बदले में क्या मिला? आज भी कोरबा की जनता निम्नलिखित समस्याओं से जूझ रही है:
-
प्रदूषण की मार और पर्यावरण असंतुलन।
-
स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी।
-
स्थानीय युवाओं के लिए सीमित रोजगार के अवसर।
-
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का अभाव।
2. हॉकी स्टेडियम और अधूरे वादे
पूर्व मंत्री ने वेदांता-बालको को उसका पुराना वादा याद दिलाया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने कोरबा में हॉकी को गोद लेने और अंतरराष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान बनाने का सार्वजनिक वादा किया था। सालों बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट सिर्फ कागजों पर है, जिससे स्थानीय खेल प्रतिभाएं पिछड़ रही हैं।
3. संकट में आईटी कॉलेज का भविष्य
आईटी कॉलेज (IT College) की स्थापना के समय भी बालको ने आर्थिक सहयोग का भरोसा दिया था। जयसिंह अग्रवाल का आरोप है कि अपेक्षित सहायता नहीं मिलने के कारण कॉलेज का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और अब छात्रों का भविष्य संकट में है।
## ‘व्हाइट पेपर’ में इन 6 बिंदुओं पर मांगा जवाब
पूर्व मंत्री ने मांग की है कि कंपनी विज्ञापनबाजी छोड़ इन सवालों का पारदर्शी जवाब दे:
-
पिछले 10 वर्षों में कंपनी ने कोरबा से कुल कितना लाभ (Profit) कमाया?
-
कोरबा जिले के विकास पर वास्तविक निवेश कितना किया गया?
-
स्थानीय युवाओं को कितने स्थायी रोजगार दिए गए?
-
प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए जमीन पर क्या ठोस काम हुए?
-
CSR (Corporate Social Responsibility) की राशि कहां और कितनी पारदर्शिता के साथ खर्च हुई?
-
हॉकी स्टेडियम और आईटी कॉलेज से जुड़े वादे अब तक अधूरे क्यों हैं?
“करोड़ों रुपये विज्ञापन पर खर्च करने से बेहतर है कि कंपनी अपने अधूरे वादे पूरे करे। टैक्स देना कानूनी दायित्व है, लेकिन जिस क्षेत्र से उद्योग फल-फूल रहा है, उसके प्रति नैतिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। कोरबा की जनता अब प्रचार नहीं, जमीन पर परिणाम देखना चाहती है।” — जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री








