पश्चिम बंगाल 8 जून: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। खुद को इलाके का ‘पुष्पा’ समझने वाले और टीएमसी (TMC) के कद्दावर व दबंग नेता जहांगीर खान का ‘दबंगई मीटर’ अब डाउन हो चुका है। रंगदारी (Extortion) के मामले में पुलिस और एसटीएफ (STF) ने साझा कार्रवाई करते हुए जहांगीर को भारत-नेपाल सीमा के पास से दबोच लिया है।
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‘झुकेगा नहीं’ बोलते-बोलते शुभेंदु के डर से भागे!
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में जहांगीर खान का सिक्का चलता था। उसे इलाके का सबसे प्रभावशाली और खौफनाक चेहरा माना जाता था, जिसका गिरोह लोगों को डराने-धमकाने और अपना रोब जमाने के लिए बदनाम था। लेकिन इस ‘पुष्पा’ की हेकड़ी तब हवा हो गई, जब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के डर से उसने चुनाव के मैदान से अपने कदम पीछे खींच लिए और नामांकन वापस ले लिया।
जब खाकी को दी थी खुलेआम चुनौती
जहांगीर खान का विवादों से पुराना नाता रहा है। चुनाव के दौरान उसका एक वीडियो जमकर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक पुलिस अधिकारी को सरेआम चुनौती देता नजर आया था। इस हरकत के बाद विपक्षी दलों ने ममता सरकार की कानून-व्यवस्था और अपराधियों को मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण पर तीखे सवाल खड़े किए थे। चुनाव के दौरान उसके खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा हुआ था।
एसटीएफ (STF) का बड़ा एक्शन: टूटेगा नेक्सस?
जहांगीर खान की गिरफ्तारी को पश्चिम बंगाल में अपराध और राजनीति के कथित गठजोड़ पर एक कड़ा प्रहार माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक:
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जहांगीर को रिमांड पर लेकर उसके पूरे नेटवर्क को खंगाला जाएगा।
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रंगदारी और धमकी के मामलों में उसकी संलिप्तता की गहन जांच होगी।
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कोर्ट की प्रक्रिया के बाद उसकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
यू-टर्न पर दी थी ‘सोनार फाल्टा’ की दलील जब जहांगीर ने डरकर अपनी उम्मीदवारी वापस ली थी, तब उसने इस पर कवर-अप करते हुए भावुक कार्ड खेला था। उसने खुद को ‘फाल्टा का बेटा’ बताते हुए कहा था कि वह ‘सोनार फाल्टा’ (सुनहरा फाल्टा) बनाना चाहता है और क्षेत्र में शांति-विकास के लिए उसने अपना नामांकन वापस लिया है। हालांकि, अब उसकी गिरफ्तारी ने इन दावों की पोल खोल दी है।







