रायपुर, 26 मई। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सबसे पॉश इलाका खम्हारडीह इस समय एक बेहद चौंकाने वाले साइबर फ्रॉड को लेकर सुर्खियों में है। इस बार किसी आम नागरिक को नहीं, बल्कि खुद सत्ताधारी दल बीजेपी के वरिष्ठ विधायक पुरंदर मिश्रा को शातिर ठगों ने अपनी ठगी का शिकार बना लिया है। ठग ने इतनी सफाई से जाल बुना कि माननीय विधायक भी झांसे में आ गए और उनके कहने पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा दिए।
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‘गाड़ी में डीजल डलवाना है…’ और झांसे में आ गए विधायक
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया गया। एक अज्ञात ठग ने विधायक पुरंदर मिश्रा को फोन किया। फोन करने वाले ने खुद को बीजेपी संगठन के एक बहुत बड़े और कद्दावर नेता का निजी सहायक (PA) बताया।
ठग ने फोन पर बेहद गंभीर आवाज में कहा— “भैया की गाड़ी में डीजल डलवाना है, बेहद जरूरी काम से निकले हैं और इस वक्त तत्काल पैसों की जरूरत पड़ गई है। आप तुरंत कुछ पैसों का इंतजाम करवा दीजिए।”
बातचीत की टोन और संगठन के बड़े नेता का नाम सुनकर विधायक पुरंदर मिश्रा को जरा भी शक नहीं हुआ। ठग ने इतनी सफाई से बात की कि विधायक ने बिना क्रॉस-वेरीफाई किए मदद करने का मन बना लिया।
मंदिर के सेवक से ट्रांसफर करवाए 10 हजार रुपए
विधायक पुरंदर मिश्रा ने उस वक्त अपने पास से पैसे भेजने के बजाय, जगन्नाथ मंदिर के सेवक नारायण मिश्रा को फोन किया और ठग के बताए अकाउंट में पैसे डालने को कहा। विधायक के निर्देश पर सेवक नारायण मिश्रा ने दो किस्तों में कुल 10,000 रुपए आरोपी के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे खुला राज: जब बड़े नेता को लगाया फोन, तो उड़ गए होश!
पैसे ट्रांसफर होने के कुछ देर बाद जब विधायक पुरंदर मिश्रा ने संतुष्टि के लिए संबंधित बड़े नेता के दफ्तर में फोन लगाया और डीजल के पैसों के बारे में बातचीत की, तो वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। बड़े नेता के स्टाफ ने साफ कह दिया कि— “हमारे यहां से ऐसा कोई फोन किसी को नहीं किया गया और न ही डीजल के लिए पैसों की जरूरत थी।”
यह सुनते ही विधायक के होश उड़ गए। उन्हें समझ आ गया कि वे एक बहुत बड़े और सुनियोजित साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
खमहरडीह थाने में FIR दर्ज, जांच में जुटी पुलिस
ठगी का अहसास होते ही हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद जगन्नाथ मंदिर के सेवक नारायण मिश्रा खमहरडीह पुलिस थाना पहुंचे और मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट की कड़ाई से जांच कर रही है, जिसमें पैसे ट्रांसफर हुए थे।
राजधानी में VIPs भी सुरक्षित नहीं? उठ रहे बड़े सवाल
रायपुर में वीआईपी लोगों को निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक जब मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, तब बाइक सवार बदमाश सरेराह उनका आईफोन छीनकर फरार हो गए थे। अब सत्ताधारी दल के विधायक के साथ हुई इस साइबर ठगी ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पैर पसारते साइबर अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब माननीय ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?








