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छत्तीसगढ़ में देश में सबसे महंगा बिक रहा तेंदूपत्ता, ₹5500 प्रति मानक बोरा मूल्य; अफवाहों पर लगा विराम

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रायपुर, 19 मई 2026

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। राज्य में तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य ₹5,500 प्रति मानक बोरा तय किया गया है, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक ने वनोपज संग्रहण और उसकी गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कई अहम जानकारियां साझा की हैं।

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गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, रिजेक्ट पत्तों को बेचने की आजादी

विभाग द्वारा केवल उन्हीं तेंदूपत्तों की खरीदी की जा रही है जो तय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं।// आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// कटे-फटे और निम्न गुणवत्ता वाले पत्तों को रिजेक्ट किया जा रहा है।

प्रबंध संचालक ने साफ किया कि:

“रिजेक्ट किए गए तेंदूपत्तों पर पूरी तरह से संग्राहकों (ग्रामीणों) का स्वामित्व है। वे इन पत्तों को निजी स्तर पर बेचने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। यह एक वैध व्यापारिक प्रक्रिया है, इसे किसी भी सूरत में ‘तस्करी’ नहीं कहा जा सकता।”

संग्रहण कार्य में तेजी: सुकमा में रिकॉर्ड खरीदी

राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य बेहद सुचारू रूप से चल रहा है। // आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// इस वर्ष संग्रहण के आंकड़े पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर हैं:

  • कुल संग्राहक: राज्य में 46,625 संग्राहक इस कार्य से जुड़े हैं, जो पिछले वर्ष से अधिक है।

  • कुल संग्रहण: अब तक राज्य में कुल 11.64 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया जा चुका है।

  • सुकमा का प्रदर्शन: 18 मई 2026 तक अकेले सुकमा जिले में 84,382 मानक बोरा (लक्ष्य का 77.84%) संग्रहण हो चुका है। कोन्टा क्षेत्र की 5 समितियों में तो 100% से भी अधिक संग्रहण दर्ज किया गया है।

‘पत्ते सड़ने’ के आरोप निकले झूठे, सीधे खाते में हो रहा भुगतान

विभाग ने उन खबरों और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें पत्तों के सड़ने की बात कही जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कोरिरास सहित किसी भी फड़ (संग्रहण केंद्र) में तेंदूपत्ता सड़ने या दीमक लगने की कोई स्थिति नहीं है। पूरी संग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी है और संग्राहकों को उनका भुगतान सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में किया जा रहा है।

सीमाओं पर कड़ी निगरानी

तेंदूपत्ते के अवैध परिवहन को रोकने के लिए ओडिशा सीमा से लगे क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा सघन गश्त और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग (Night Patrolling) की जा रही है। किसी भी तरह के अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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