नई दिल्ली 17 मई : सोने के बाद अब चांदी के खरीदारों और व्यापारियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने देश में चांदी के आयात (इंपोर्ट) को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। (आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज) सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चांदी की कई अहम कैटेगरीज को ‘फ्री लिस्ट’ से सीधे बाहर करके उन्हें ‘रिस्ट्रिक्टेड’ (प्रतिबंधित) कैटेगरी में डाल दिया है।
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इसका सीधा मतलब यह है कि अब विदेशों से चांदी मंगाना पहले जितना आसान नहीं होगा और इसके लिए सरकार से विशेष लाइसेंस और अतिरिक्त मंजूरी लेनी होगी।
आखिर सरकार ने क्यों लिया यह अचानक फैसला?
इस कदम के पीछे सरकार की एक बड़ी आर्थिक रणनीति छिपी है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करना: सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार बढ़ रहे कीमती धातुओं के आयात पर लगाम लगाना और व्यापार घाटे को तेजी से कम करना है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)
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विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) की सुरक्षा: पिछले काफी समय से हो रहे भारी आयात के कारण भारत के कीमती विदेशी मुद्रा भंडार पर बुरा असर पड़ने की चिंता सता रही थी, जिसे संभालने के लिए यह फैसला लिया गया।
सोने की जगह चांदी की तरफ भाग रहे थे लोग, सरकार ने भांप ली चाल
सरकार ने बाजार के एक बड़े ट्रेंड को समय रहते भांप लिया है:
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बढ़ती कीमतों का असर: हाल ही में सरकार ने एक और बड़ा झटका देते हुए सोना और चांदी दोनों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को सीधे 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)
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विकल्प बनी चांदी: सोने की कीमतें आसमान छूने के बाद निवेशक और आम खरीदार ज्वेलरी व निवेश के लिए तेजी से चांदी की तरफ रुख कर रहे थे। सोने के मुकाबले चांदी काफी सस्ती होने के कारण लोग इसे सुरक्षित विकल्प मानकर भारी मात्रा में खरीद रहे थे। इसी बेलगाम आयात को रोकने के लिए सरकार ने यह सख्ती की है।
विदेशी मुद्रा बचाने और रुपये को मजबूती देने पर पूरा जोर
मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है:
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रुपये को मजबूती: वैश्विक स्तर पर चल रही उथल-पुथल, युद्ध के हालातों और बढ़ते इंपोर्ट बिल को देखते हुए सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपये पर बढ़ रहे दबाव को कम करना चाहती है।(आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज)
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आर्थिक विशेषज्ञों की चेतावनी: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोना-चांदी का आयात इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) और व्यापार घाटा दोनों ही खतरनाक स्तर पर पहुंच सकते हैं।
30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा आयात; आगे और मंदी के आसार
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ऐतिहासिक गिरावट: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ऊंची इम्पोर्ट ड्यूटी और इंटरनेशनल मार्केट में आसमान छूती कीमतों की वजह से अप्रैल महीने में देश के भीतर सोने-चांदी का आयात गिरकर पिछले करीब 30 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है।
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भविष्य का अनुमान: बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार द्वारा लगाई गई इन नई पाबंदियों के बाद आने वाले महीनों में चांदी के आयात में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार में चांदी की सप्लाई और कीमतों पर पड़ेगा।








