कोरबा 16 मई । शनिवार की शाम ऊर्जाधानी कोरबा में मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि पूरा शहर सहम गया। अचानक आए तेज अंधड़, मूसलाधार बारिश और धूलभरी हवाओं ने कुछ ही मिनटों में चमचमाते शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।// आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// चक्रवाती हवाओं के साथ कुछ इलाकों में मामूली ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। इस अचानक बदले मौसम ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया, जिससे पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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सड़कों पर पसरा सन्नाटा, कई इलाकों में गिरे पेड़ और होर्डिंग
तेज आंधी और तूफान के कारण शहर के मुख्य मार्गों से लेकर रिहायशी इलाकों तक में भारी नुकसान की खबरें हैं।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// कई जगहों पर विशालकाय पेड़ और सड़क किनारे लगे बड़े-बड़े विज्ञापन होर्डिंग्स धराशायी हो गए। हवा का वेग इतना तेज था कि सड़कों पर चल रहे कई दोपहिया वाहन अनियंत्रित होकर गिर गए।
बाजारों में भगदड़ जैसे हालात बन गए; व्यापारी आनन-फानन में दुकानें बंद कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। तूफान के तुरंत बाद मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक रेंगता हुआ दिखाई दिया और लोग जहां-तहां फंस गए।
घंटों गुल रही बत्ती, अंधेरे में डूबा शहर
बारिश और आंधी शुरू होते ही शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। तेज हवाओं के कारण बिजली के तार टूटने और फॉल्ट आने से पूरे शहर में अंधेरा छा गया।//आप पढ़ रहे हैं द खटिया खड़ी न्यूज// लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। मौसम की इस मार से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है, जिससे लोगों की परेशानी दोगुनी हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आंधी इतनी खौफनाक थी कि “कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो पूरा शहर थम गया हो।” पुरानी बस्ती समेत कई इलाकों में देर रात तक बिजली व्यवस्था ठप रही।
हवा में तैरता ‘राखड़’: कोरबा वासियों के लिए दोहरी मुसीबत
कोरबा वासियों के लिए मौसम की यह मार केवल आंधी-पानी तक सीमित नहीं रही। तेज हवाएं चलते ही स्थानीय पावर प्लांटों के राखड़ बांधों (Ash Dykes) से उड़ने वाली राख ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। हवा में उड़ती इस जहरीली राख के गुबार के कारण चारों तरफ धुंध छा गई, जिससे विजिबिलिटी बेहद कम हो गई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी तेज हवा चलती है, राखड़ का यह तांडव कोरबा की नियति बन जाता है। इस उड़ती राख के कारण न केवल राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, बल्कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी कई शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
जनता का दर्द: “राखड़ बांधों में यदि नियम के मुताबिक पानी का छिड़काव किया जाता या पानी भरकर रखा जाता, तो इस वायु प्रदूषण से काफी हद तक राहत मिल सकती थी। लेकिन प्रबंधन की लापरवाही की कीमत आम जनता को अपनी सेहत देकर चुकानी पड़ रही है।”
नेताओं के खोखले वादे और सिस्टम की ‘सेटिंग’ पर भड़की जनता
इस आपदा के बीच स्थानीय प्रशासन और नेताओं के खिलाफ जनता का गुस्सा साफ देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि नेताओं को वायु प्रदूषण और राखड़ की समस्या सिर्फ चुनाव के वक्त ही याद आती है। चुनाव आते ही शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत दर्ज करने के बाद नेता इन वादों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
पब्लिक चर्चाओं में यह आरोप भी खुलकर सामने आ रहा है कि यहां का पर्यावरण विभाग पूरी तरह से ‘सेटिंग’ के खेल में लगा हुआ है, जिसके कारण नियमों का उल्लंघन करने वाले पावर प्लांटों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। जनता का साफ कहना है कि सिस्टम की इस उदासीन सोच के कारण ही आज कोरबा की जनता ‘भाड़ में जाने’ को मजबूर है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले कुछ घंटों तक तेज हवाओं के साथ बारिश का यह दौर जारी रह सकता है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या जर्जर होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें।
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