नई दिल्ली | 10 मई 2026 भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2026 में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों की बिक्री में 75.1% की भारी बढ़ोतरी हुई है। टू-व्हीलर सेगमेंट भी 60.7% की ग्रोथ के साथ कुलांचे भर रहा है। लेकिन, इस चकाचौंध के पीछे एक कड़वा सच भी है—भारत का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस रफ्तार का साथ देने में फिलहाल नाकाम साबित हो रहा है।
संख्या बनाम सक्षमता: सिर्फ चार्जर लगाना काफी नहीं
देश में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 2022 में 5,000 थी, जो 2025 तक बढ़कर 29,000 के पार पहुँच गई। लेकिन ‘एक्सीकॉम’ की रिपोर्ट एक डरावनी तस्वीर पेश करती है। फरवरी 2024 के एक सर्वे में पाया गया कि देश के लगभग आधे पब्लिक चार्जर (12,100) किसी न किसी तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े थे।
Zenergize के CEO नवनीत डागा का मानना है कि असली चुनौती भारत की भीषण गर्मी और बिजली के उतार-चढ़ाव के बीच इन चार्जर्स को चालू रखने की है। जब तक चार्जिंग स्टेशन पेट्रोल पंपों की तरह भरोसेमंद नहीं होंगे, आम आदमी का डर कम नहीं होगा।
ग्लोबल स्टैंडर्ड से कोसों दूर भारत
डेलॉयट इंडिया के मुताबिक, भारत में चार्जिंग नेटवर्क की स्थिति वैश्विक मानकों के मुकाबले काफी कमजोर है:
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अनुपात: भारत में 235 गाड़ियों पर केवल 1 चार्जर है, जबकि वैश्विक औसत 1:6 से 1:20 के बीच है।
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लक्ष्य: नीति आयोग के 30% EV लक्ष्य को पाने के लिए 13.2 लाख चार्जर की जरूरत है, जबकि अभी हम सिर्फ 30,000 पर खड़े हैं।
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समय: दुनिया जहाँ 30 मिनट में गाड़ी चार्ज कर रही है, वहीं भारत में औसतन 1.5 से 2 घंटे का समय लग रहा है।
“जब 70% EV यूजर खराब चार्जर की समस्या झेल रहे हों, तो यह सिर्फ तकनीकी खराबी नहीं बल्कि भरोसे की कमी है।” — आनंद काबरा, CEO, जीयॉन (Geon)
एप्स का जंजाल और अपार्टमेंट की दीवारें
EV मालिकों के लिए एक चार्जर ढूंढना किसी जंग जीतने जैसा है। ग्राहकों को चालू चार्जर की तलाश में 17 से 20 अलग-अलग मोबाइल ऐप्स का सहारा लेना पड़ता है।
दूसरी ओर, शहरों में रहने वाले लोगों के लिए ‘होम चार्जिंग’ एक बड़ा सिरदर्द बन गई है। हाउसिंग सोसायटियों (RWAs) में वेंटिलेशन, ट्रांसफार्मर क्षमता और आग लगने के डर से चार्जिंग पॉइंट लगाने में अड़चनें पैदा की जा रही हैं। थिंक टैंक ‘नेशन फर्स्ट’ का कहना है कि अगर 70-80% चार्जिंग घरों में नहीं हुई, तो EV क्रांति अधूरी रह जाएगी।
उम्मीद की किरण: शहरी प्लानिंग में बदलाव
इस संकट को देखते हुए हरियाणा जैसे राज्यों ने पहल शुरू की है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) अब बिल्डिंग नियमों में बदलाव कर रहा है ताकि रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के बेसमेंट में चार्जिंग पॉइंट अनिवार्य किए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि जब चार्जिंग ‘शहरी प्लानिंग’ का हिस्सा बनेगी, तभी ‘रेंज एंग्जायटी’ (दूरी का डर) खत्म होगा।
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