कोरबा, 10 मई।
धन्य है वह ‘दो गज जमीन’ और उससे भी धन्य हैं वे लोग, जो उस पर अपना हक जमाने के लिए सड़क को ही कुरुक्षेत्र बना बैठे! दर्री थाना क्षेत्र के गोपालपुर में शुक्रवार की रात मनोरंजन का ऐसा ‘फ्री शो’ चला कि लोग नेटफ्लिक्स भूल गए। जमीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए अपनों और परायों के बीच लाठी-डंडों का ऐसा मधुर मिलन हुआ कि देखने वाले दाँतों तले उँगली दबा लें।
मुख्य आकर्षण: ‘पागलपंती भी जरूरी है’
विवाद तो वैसे पुराना था, लेकिन शुक्रवार की रात इसमें नया ‘तड़का’ लगा। जैसे ही सूरज ढला, दोनों पक्षों की बुद्धि भी शायद ढल गई। फिर क्या था? लाठी-डंडे निकले, और शुरू हो गया ‘द ग्रेट गोपालपुर दंगल’। इस संघर्ष की खास बात यह थी कि इसमें ‘महिला सशक्तिकरण’ का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला—पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं भी लाठियां भांज रही थीं।
वायरल वीडियो: ऑस्कर तो नहीं, पर व्यूज पक्के!
किसी राहगीर ने, जिसने शायद शांति बनाए रखने से ज्यादा जरूरी ‘कंटेंट’ बनाना समझा, इस पूरी नौटंकी का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो देखकर लगता है कि जमीन के कागज भले ही कोर्ट में हों, लेकिन फैसला तो सड़क पर ‘लकड़ी’ ही करेगी।
पुलिस की शांति, जनता की क्रांति
मजेदार बात यह है कि इतनी ‘कुटाई’ के बाद भी किसी ने थाने का रास्ता नहीं देखा। शायद दोनों पक्षों को अपनी मर्दानगी और लाठियों पर पुलिस से ज्यादा भरोसा है। वे आपस में ‘मामला सुलझाने’ की बात कर रहे हैं, पर स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शांति सिर्फ अगले राउंड की तैयारी है।
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