कोरबा 8 मई।

छत्तीसगढ़ की ऊर्जा धानी कोरबा में बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख (Fly Ash) के निपटान को लेकर चल रहा बड़ा खेल अब बेनकाब होने वाला है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एनआईटी (NIT) राउरकेला के विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम ने कोरबा पहुंचकर सीएसईबी (CSEB) के झाबु राखड़ बांध की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। इस औचक कार्रवाई ने उन अधिकारियों और ठेकेदारों की नींद उड़ा दी है, जो लंबे समय से राख के प्रबंधन में अनियमितताएं कर अपनी जेबें भर रहे थे।
तकनीकी कसौटी पर झाबु बांध की मजबूती एनआईटी की टीम झाबु बांध के उन तकनीकी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता रहा है। जांच मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर केंद्रित है:
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क्षमता से ज्यादा भराव: क्या बांध अपनी निर्धारित सीमा से अधिक राख उगल रहा है? टीम यह देख रही है कि ओवरलोडिंग की वजह से ढांचा कितना असुरक्षित हो गया है।
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ऊंचाई और सुरक्षा मानक: क्या बांध की वर्तमान ऊंचाई नियमों के मुताबिक है? ऊंचाई बढ़ने से दबाव बढ़ता है, जो भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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डिजाइन से छेड़छाड़: क्या लागत बचाने और भ्रष्टाचार के चक्कर में बांध के मूल ड्राइंग और डिजाइन में बदलाव किया गया है?
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घटिया निर्माण सामग्री: बांध के तटबंधों (Dykes) के निर्माण में इस्तेमाल किए गए मटेरियल की गुणवत्ता की भी जांच हो रही है, ताकि यह पता चल सके कि दीवारें बार-बार क्यों दरकती हैं।
भ्रष्टाचार की राख के नीचे दबेंगे रसूखदार! कोरबा में राखड़ बांधों का टूटना और राख का नदियों व बस्तियों में फैलना एक नासूर बन चुका है। आरोप लगते रहे हैं कि ‘फ्लाई ऐश यूटिलाइजेशन’ के नाम पर करोड़ों का घोटाला किया गया है। अब एनआईटी की यह स्वतंत्र जांच रिपोर्ट दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी।
जैसे ही विशेषज्ञों ने फील्ड पर सैंपलिंग और दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया, संयंत्र प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के चेहरे पर तनाव साफ नजर आने लगा है। अगर जांच में तकनीकी खामियां और भ्रष्टाचार साबित होता है, तो कई बड़े नामों पर कड़ी कार्रवाई होना तय है।
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