रायपुर 24 मार्च : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अब कुली खोजने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और न ही भारी भरकम सामान के साथ मोल-भाव की स्थिति से गुजरना होगा। रायपुर रेल मंडल एक ऐसे अभिनव मोबाइल ऐप पर काम कर रहा है, जो यात्री और कुली के बीच की दूरी को डिजिटल माध्यम से खत्म कर देगा।
सर्वे और फीडबैक: जनता की पसंद से बन रहा है ऐप
इस व्यवस्था को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाने के लिए रेलवे प्रशासन फिलहाल ‘फीडबैक मोड’ में है। रायपुर सहित मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर क्यूआर (QR) कोड लगाए गए हैं। यात्री इन्हें स्कैन करके एक सर्वे में भाग ले रहे हैं, जिसमें 12 प्रमुख सवाल पूछे जा रहे हैं। इन सवालों के जरिए रेलवे यह समझने की कोशिश कर रहा है कि:
➡️क्या यात्री ऑनलाइन भुगतान को प्राथमिकता देंगे?
➡️क्या ऐप के जरिए कुली बुकिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी?
➡️सामान के वजन और दूरी के हिसाब से किराए का ढांचा कैसा होना चाहिए?
इन सुझावों के आधार पर ही ऐप के फीचर्स को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि यह आम आदमी के लिए उपयोग में सरल (User Friendly) हो।
कोच के दरवाजे पर तैनात मिलेगा कुली
प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीक लोकेशन सर्विस होगी। बुकिंग के दौरान यात्री को अपना पीएनआर (PNR) या ट्रेन नंबर और कोच/सीट नंबर दर्ज करना होगा। जैसे ही ट्रेन रायपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आएगी, आवंटित कुली यात्री के कोच के सामने पहले से मौजूद रहेगा। यह तकनीक बुजुर्गों, अकेले सफर करने वाली महिलाओं और बीमार यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी।
निर्धारित किराया और पारदर्शिता
अक्सर यात्रियों की शिकायत रहती है कि कुली मनमाना किराया वसूलते हैं। इस ऐप में सभी लाइसेंसधारी कुलियों का नाम, फोटो और उनका डिजिटल बिल्ला नंबर मौजूद रहेगा। सामान के वजन और रेलवे के मानकों के अनुसार किराया पहले से ऐप पर डिस्प्ले होगा। यात्री सीधे ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे, जिससे नकद की समस्या और विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
रेलवे का उद्देश्य: स्मार्ट स्टेशन, सुलभ यात्रा
रायपुर रेल मंडल का लक्ष्य स्टेशन पर भीड़भाड़ कम करना और यात्रियों के अनुभव को अधिक सुखद बनाना है। इस ऐप के लॉन्च होने के बाद रायपुर स्टेशन उन चुनिंदा स्टेशनों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहाँ पोर्टर (कुली) सेवा पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है।
Narendra








