“साकेत भवन में गूंजेगी अब आम जनता की आवाज; महापौर और आयुक्त ने शुरू की ‘मेयर की पाती’ योजना”

कोरबा | 13 मार्च 2026 कोरबा नगर पालिक निगम के मुख्य प्रशासनिक भवन ‘साकेत’ की दहलीज अब आम जनता की शिकायतों के लिए केवल एक दफ्तर नहीं, बल्कि त्वरित समाधान का केंद्र बनने जा रही है। महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत एवं आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय ने “मेयर की पाती” योजना का शंखनाद कर शहरवासियों को एक बड़ी सौगात दी है। अब लाल , हरा , और नीले रंगों के ये बॉक्स तय करेंगे कि जनता की मूलभूत समस्याओं का अंत कितनी जल्दी होगा।

तीन रंग, तीन समस्याएँ और 24 घंटे का संकल्प
निगम परिसर के प्रवेश द्वार पर तीन विशेष रंगों के लेटर बॉक्स स्थापित किए गए हैं। इनका वर्गीकरण इस प्रकार है: लाल बॉक्स: बिजली और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं का समाधान। हरा बॉक्स: स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़ी अर्जियों के लिए। नीला बॉक्स: पेयजल से संबंधित शिकायतों के लिए समर्पित।
डिजिटल निगरानी और अधिकारियों की जवाबदेही
योजना की सबसे बड़ी खूबी इसकी पारदर्शिता और गति है। इन बॉक्स से निकलने वाली ‘पाती’ (शिकायत पत्र) सीधे कंप्यूटर में दर्ज होगी और पलक झपकते ही संबंधित प्रभारी अधिकारी के व्हाट्सएप पर पहुँच जाएगी। अधिकारी के पास समस्या सुलझाने के लिए केवल 24 घंटे का समय होगा। यदि इस समय सीमा में कार्य नहीं हुआ, तो अधिकारी को सीधे आयुक्त को लिखित स्पष्टीकरण देना होगा कि देरी का ठोस कारण क्या है।
सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की नई कड़ी
महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत और आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय की इस पहल को शहर के सौंदर्यीकरण और नागरिक सुविधाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रभारी अधिकारी की होगी जवाबदेही –
इन लेटर बाक्स में आमजन द्वारा डाले गये शिकायत पत्रों को तत्काल निकालकर उन्हें कम्प्यूटर मंे दर्ज किया जायेगा तथा संबंधित प्रभारी अधिकारी के मोबाईल पर व्हाट्सअप के माध्यम से पत्रों को प्रेषित किया जायेगा, पत्र प्राप्त होते ही प्रभारी अधिकारी समस्या पर तत्काल संज्ञान लेंगे तथा आवश्यक कार्यवाही सम्पन्न कराते हुये निर्धारित समयसीमा 24 घंटे के अंदर समस्या का संतुष्टिपूर्ण निराकरण करायेंगे, यदि किसी कारणवश समस्या का समाधान निर्धारित समयसीमा में संभव नहीं हो पाता, तो इसका ठोस कारणों से प्रभारी अधिकारी निगम आयुक्त को अवगत कराते हुये अपना प्रतिवेदन देंगे तथा यह बतायेंगे कि समस्या का समाधान कब तक संभव हो सकेगा।









