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बिहार और बंगाल के बँटवारे की सुगबुगाहट: क्या बनेगा नया राज्य?

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हाल के दिनों में सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि केंद्र सरकार बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल (North Bengal) के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) बनाने पर विचार कर रही है।

क्यों शुरू हुई यह चर्चा?

इस चर्चा के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

  • सुरक्षा और चिकन नेक (Chicken’s Neck): सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यह हिस्सा भारत को उत्तर-पूर्व (North East) राज्यों से जोड़ता है। आंतरिक सुरक्षा और विदेशी घुसपैठ को रोकने के लिए इस क्षेत्र को सीधे केंद्र के नियंत्रण में लाने की दलील दी जा रही है।

  • विकास में पिछड़ापन: बिहार का सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया) और उत्तर बंगाल के कई जिले आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाते हैं। स्थानीय नेताओं का तर्क है कि राज्य सरकारों से दूर होने के कारण इन इलाकों तक विकास सही ढंग से नहीं पहुँच पाता।

  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: सीमावर्ती इलाकों में बदलती डेमोग्राफी और घुसपैठ के मुद्दों को लेकर भी कई संगठन लंबे समय से इसे अलग प्रशासनिक इकाई बनाने की मांग कर रहे हैं।

किन इलाकों के शामिल होने की है चर्चा?

चर्चाओं के मुताबिक, यदि ऐसा होता है तो इसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हो सकते हैं:

  1. पश्चिम बंगाल से: दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार और उत्तर दिनाजपुर।

  2. बिहार से: किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

जहाँ भाजपा के कुछ स्थानीय नेता इस विचार का समर्थन करते दिखे हैं, वहीं ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बिहार में विपक्षी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह राज्यों को तोड़ने और संघीय ढांचे पर हमला करने की कोशिश है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है।

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