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षड्यंत्र: चुनाव आयोग की ‘फॉर्म-7’ व्यवस्था का दुरुपयोग कर वोट काटने की बड़ी साजिश, भाजपा के 5 बूथ अध्यक्षों के नाम और वोटर आईडी का हुआ गलत इस्तेमाल

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कोरबा | शहर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य के दौरान एक ऐसा सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है। SIR (सॉफ्टवेयर सिस्टम) के जरिए चुनावी खेल करने वालों का पर्दाफाश होने के बाद अब उन ‘आपत्तिकर्ताओं’ ने ही मोर्चा खोल दिया है, जिनके नाम पर 1566 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि इन आपत्तिकर्ताओं ने खुद स्वीकारा है कि उन्होंने कभी ऐसा कोई आवेदन दिया ही नहीं।

भाजपा पदाधिकारियों के नाम पर ‘फर्जी’ खेल

कोतवाली पुलिस और सीएसईबी चौकी में पहुंचे पांच भाजपा बूथ लेवल अध्यक्षों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस प्रशासन को चौंका दिया है। उनका दावा है कि किसी अज्ञात सिंडिकेट ने उनके नाम और एपिक (EPIC) नंबर की चोरी की और फर्जी तरीके से फॉर्म-7 जमा कर दिया। इन फॉर्मों के जरिए सैकड़ों निर्दोष मतदाताओं के नाम सूची से काटने की साजिश रची गई थी।

इन 7 लोगों ने दर्ज कराई FIR: ‘हमारे हस्ताक्षर भी जाली’

सीएसईबी चौकी में पंप हाउस क्षेत्र के सात नागरिकों ने हिम्मत दिखाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल कर निर्वाचन विभाग को गुमराह किया गया है। शिकायत दर्ज कराने वालों में शामिल हैं:1.मथुरा दास महंत, पिता भोलादास महंत 2. बसंत खैरवार, पिता राजा खैरवार 3. घासीराम मांझी, पिता गोर्वधन मांझी 4.फकरुद्दीन खान, पिता सफरुद्दीन खान 5.जमीदार आलम, पिता सिकंदर आलम 6.कृष्ण कुमार ठाकुर, पिता छत्रपाल ठाकुर 7.शान कुमार सहिस, पिता गोलाराम कुलदीप

इन सभी का एक ही स्वर है—“हमने कोई आपत्ति दर्ज नहीं की, हमारे फर्जी हस्ताक्षर कर चुनाव आयोग की व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है।” उन्होंने मांग की है कि इस सामाजिक विद्वेष फैलाने वाली साजिश के असली चेहरों को बेनकाब किया जाए।

पुलिस की सुस्ती पर सवाल, कांग्रेस ने खोला मोर्चा

इतने बड़े पैमाने पर पहचान की चोरी और चुनावी हेरफेर की शिकायत के बावजूद पुलिस की कार्रवाई अब तक ठंडी नजर आ रही है। इस पर कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:▪️डिजिटल डेटा और जमा किए गए फॉर्म्स की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच हो।▪️दोषियों को चिन्हित कर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।▪️चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।

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