दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से रूह कंपा देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक मासूम लड़की, जिसका बचपन खेलकूद में बीतना चाहिए था, वह पिछले 7 वर्षों से 6 दरिंदों की हवस का शिकार होती रही। जब पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर महिला थाने में अपनी आपबीती सुनाई, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन 4 नरपिशाच अब भी खुले आम घूम रहे हैं।
बचपन से जवानी तक का नर्क: 2018 से 2025 तक की दरिंदगी
पीड़िता के मुताबिक, प्रताड़ना का यह सिलसिला अप्रैल 2018 में शुरू हुआ था, जब वह नाबालिग थी। आरोपियों ने उसकी मासूमियत का फायदा उठाकर उसे अपनी हवस का जरिया बना लिया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि अक्टूबर 2025 तक अलग-अलग समय पर कुल 6 लोगों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। 7 सालों तक वह लड़की घुट-घुट कर जीने को मजबूर रही, जबकि समाज और सिस्टम को इसकी भनक तक नहीं लगी।
60 साल का बुजुर्ग भी शामिल, पुलिस की गिरफ्त में दो
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
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विजय स्वाइन (37 वर्ष) – निवासी: दुर्गा नगर, भिलाई।
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अनिल चौधरी (60 वर्ष) – निवासी: जोन-1, खुर्शीपार। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों में 60 साल का बुजुर्ग भी शामिल है, जो समाज के गिरते नैतिक स्तर की गवाही दे रहा है। पुलिस ने इनके खिलाफ BNS की धारा 65(1), 70(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 व 12 के तहत केस दर्ज किया है।
फॉलो-अप: जांच ठंडी पड़ी, 4 आरोपी अब भी फरार
मामले में चौंकाने वाला मोड़ यह है कि दो गिरफ्तारियों के बाद दुर्ग पुलिस की जांच की रफ्तार ठंडी पड़ती नजर आ रही है। वारदात में शामिल 4 अन्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस की टीमें दबिश देने का दावा तो कर रही हैं, लेकिन घटना की भयावहता और जन-आक्रोश को देखते हुए यह कार्रवाई काफी धीमी है।
शहर के व्यस्त इलाकों (भिलाई और खुर्शीपार) में रहने वाले ये अपराधी अब तक पुलिस के चंगुल से दूर कैसे हैं? यह सवाल पुलिसिया चौकसी पर बड़ा दाग लगा रहा है। आम जनता में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि इतने संवेदनशील और जघन्य मामले में भी पुलिस अब तक सभी चेहरों को बेनकाब नहीं कर पाई है।
जनता का सवाल: क्या रसूख बचा रहा है बाकी अपराधियों को?
जिस तरह से 7 साल तक यह नेटवर्क चलता रहा और अब गिरफ्तारियों में देरी हो रही है, उससे लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। क्या फरार आरोपियों को कोई राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? पीड़िता को न्याय तब तक नहीं मिलेगा जब तक कि वह छह के छह दरिंदे सलाखों के पीछे नहीं पहुँच जाते।
नोट: कानूनन यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है, इसलिए समाचार में पीड़िता की गोपनीयता का पूर्ण ध्यान रखा गया है।








